Premchand Ke Phate Joote Question Answer | प्रेमचंद के फटे जूते प्रश्न-उत्तर

Premchand ke Phate Joote Question Answer | प्रेमचंद के फटे जूते प्रश्न-उत्तर

Premchand ke Phate Joote Question Answer | प्रेमचंद के फटे जूते प्रश्न-उत्तर

Premchand ke Phate Joote Question Answer | प्रेमचंद के फटे जूते प्रश्न-उत्तर

          आज हम आप लोगों को क्षितिज भाग -1  कक्षा-9 पाठ-6 (NCERT Solution for class 9 kshitij bhag-1 chapter – 6) प्रेमचंद के फटे जूते (Premchand ke Phate Joote) गद्य खंड के प्रश्न-उत्तर के बारे में बताने जा रहे है जो कि हरिशंकर परसाई (Harishankar Parsai) द्वारा लिखित है। इसके अतिरिक्त यदि आपको और भी NCERT हिन्दी से सम्बन्धित पोस्ट चाहिए तो आप हमारे website के Top Menu में जाकर प्राप्त कर सकते हैं।

प्रेमचंद के फटे जूते | Premchand ke Phate Joote

प्रश्न-उत्तर 

प्रश्न 1. हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं?

उत्तर : लेखक ने प्रेमचंद का जो शब्द चित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे उनके व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ सामने आती हैं –

  • सादा जीवन प्रेमचंद आडंबर तथा दिखावापूर्ण जीवन से दूर रहते थे। वे गाँधी जी की तरह सादा जीवन जीते थे।
  • उच्च विचारप्रेमचंद के विचार बहुत ही उच्च थे। वे सामाजिक बुराइयों से दूर रहे। वे इन बुराइयों से समझौता नकर सके।
  • स्वाभिमानीप्रेमचंद जी दूसरों की वस्तुओं को माँगना उचित नहीं समझते थे। वे अपनी दीन-हीन दशा में संतुष्ट थे।
  • सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने वाले प्रेमचंद ने समाज में फैली हुई कुरीतियों के प्रति लोगों को सावधान किया। वे एक स्वस्थ समाज चाहते थे तथा स्वयं भी बुराइयों से कोसों दूर रहने वाले थे।
  • अपनी स्थिति से संतुष्टप्रेमचंद का जीवन हमेशा अभावों में बीता। उन्होंने अपनी स्थिति दूसरों से छिपाकर रखी।वे जैसे भी थे उसी में खुश रहने वाले व्यक्ति थे।
  • संघर्षशीलप्रेमचंद जी अपने जीवन में आने वाली मुसीबतों से कभी भी दूर नहीं भागते थे बल्कि वे उनका डटकर सामना करते थे और उसपर विजय पाकर आगे बढ़ते थे। 

प्रश्न 2. सही कथन के सामने (ü) का निशान लगाइए 

(क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है।

(ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए।

(ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है। 

(घ) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो?

उत्तर : (क) (x) (ख) (ü) (ग) (x) (घ) (x) 

प्रश्न 3. नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए 

(क) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं। 

(ख) तुम परदे का महत्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं। 

(ग) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो?

उत्तर :

(क) व्यंग्य- जूते का स्थान पाँवों में अर्थात् नीचे होता है यह हमारी सामर्थ्य अथवा ताकत का प्रतीक माना जाता है। टोपी का स्थान सिर पर अर्थात् सम्माननीय होता है पर स्थिति इसके विपरीत है। आज लोग अपने सामर्थ्य के बल पर अनेक टोपियों (सम्मानित एवं गुणी व्यक्तियों) को अपने जूते पर झुकने को विवश कर देते हैं और लोग अपना स्वाभिमान भूलकर अपना सिर उनके सामने झुकाते हैं।

(ख) व्यंग्य- लोगों में एक प्रवृत्ति या आदत होती है अपने बुराइयों को छिपाने की या उन पर पर्दा डालने की। लोग अपनी बुराइयों को दूसरों के सामने आने देना नहीं चाहते हैं, पर प्रेमचंद जी ने अपनी बुराइयों को कभी छिपाने का प्रयास नहीं किया। वे अंदर से तथा बाहर से दोनों तरफ से एक समान थे। दूसरे लोग पर्दे की आड़ में कुछ भी करते रहते हैं।

(ग) व्यंग्य- प्रेमचंद जी ने सामाजिक बुराइयों को अपनाना तो दूर उनकी तरफ देखना भी नहीं चाहते थे। उन्होंने इनकी तरफ हाथ से भी इशारा नहीं किया। प्रेमचंद जी ने इन सभी बुराइयों को इतना घृणित समझा कि पैर की उँगली से उसकी ओर इशारा करते हुए दूसरों को भी उससे सावधान किया।

प्रश्न 4. पाठ में एक जगह पर लेखक सोचता है कि फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी? ‘लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी।’ आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती हैं?

उत्तर : प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने के निम्नलिखित वजह हो सकतती हैं –

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(i) लोग प्रायः दैनिक जीवन में साधारण कपड़े पहनते हैं और विशेष अवसरों के लिए अच्छे कपड़ों का उपयोग करते हैं। प्रेमचंद जी के पास शायद दूसरी पोशाक नहीं थी। 

(ii) लेखक सोचता है कि सादा जीवन जीने वाला यह व्यक्ति भीतर-बाहर सब तरफ से एक जैसा है। इसका दोहरा व्यक्तित्व नहीं है, इन्होंने कभी दिखावटी जीवन नहीं जिया है।

प्रश्न 5. आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन सी बातें आकर्षित करती हैं?

उत्तर : इस व्यंग्य में हमें लेखक की कई बातें आकर्षित करती हैं।

सर्वप्रथम – लेखक ने व्यंग्यात्मक शैली के माध्यम से महान साहित्यकार प्रेमचंद का चित्र प्रस्तुत किया है। उनकी विशेषताओं से हमें परिचित कराया है।

दूसरा – लेखक ने प्रेमचंद पर व्यंग्य तो किया है, पर उन्होंने स्वयं को कभी भी व्यंग्य से अलग नहीं रखा।

तीसरा – लेखक को मानव जीवन की अत्यंत गहरी समझ है। उन्होंने जीवन के सुख-दुख को अत्यंत निकट से देखा है।

चौथा – लेखक सामाजिक बुराइयों तथा कुरीतियों के प्रति भी सजग है। उन्होंने  व्यंग्य के माध्यम से इन पर भी प्रहार किया है।

प्रश्न 6. पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन संदर्भो को इंगित करने के लिए किया गया होगा?

उत्तर : ‘टीला’ रास्ते में आने वाला वह अवरोध है जिसको लाँघना या पार करना कठिन होता है। इस व्यंग्य में टीला शब्द का प्रयोग प्रेमचंद जी के जीवन में आने वाली सामाजिक कठिनाइयों के लिए किया गया है, जिसे पंडित, पुरोहित, मौलवी, जमींदार आदि समाज के कथित ठेकेदारों ने खड़ी की है। इनके कारण ही ऊँच-नीच की भावना, जाति-पाँति, छुआछूत, बाल-विवाह, शोषण, बेमेल विवाह, अमीर-गरीब की भावना आदि टीले के रूप में खड़ी रहती है और हमारे मार्ग को अवरुद्ध करती हैं।

 

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 7. प्रेमचंद के फटे जूते (Premchand ke Phate Joote) को आधार बनाकर परसाई जी ने यह व्यंग्य लिखा है। आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए।

उत्तर : मेरे घर के पास में एक डॉक्टर साहब रहते हैं। उनकी डिग्री के बारे में लोगों को आजतक नहीं पता लगा, क्योंकि उनसे पूछने पर एक ही जवाब मिलता है कि डिग्री से इलाज नहीं होता, इलाज होता है अनुभव से। तुम मेरा अनुभव देखो। सचमुच उन डॉक्टर साहब को मैंने जब भी देखा होगा, वे हमेशा ही अपने गले में स्टेथेस्कोप लटकाए रहते हैं। उनसे इलाज कराने जाओ तो वे पहले अपने अनुभव की चर्चा करते हैं, फिर अपनी अति व्यस्तता बताते हुए कहते हैं, जल्दी करो मुझे कई मरीज देखने बाहर जाना है, जबकि वे अपनी क्लीनिक छोड़कर बाहर नहीं निकलते हैं। बात करने पर लगेगा कि बराक ओबामा के बाद सबसे व्यस्त आदमी वही हैं। उनकी व्यस्तता सुन मरीज दुबारा उनके पास नहीं आते, पर उनकी व्यस्तता कम होने का नाम ही नहीं लेती है।

प्रश्न 8. आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है?

उत्तर : आज के समय में लोगों की सोच और दृष्टिकोण में काफी बदलाव आ गया है। लोग प्रथम मुलाकात में व्यक्ति का स्वागत-सत्कार उसकी वेशभूषा देखकर ही करते हैं। आज गुणी-से-गुणी व्यक्ति भी अच्छे कपड़ों के अभाव में आदरणीय नहीं बन पाता है। ऐसे में लोग अपनी वेशभूषा के प्रति विशेष रूप से सजग हो गए हैं। लोग अपनी हैसियत जताने के लिए अच्छे कपड़े पहनते हैं। आज सादा-जीवन जीने वालों को पिछड़ा समझा जाने लगा है। अब तो ऐसे भी छात्र-छात्राएँ मिल जाएँगे जिन्हें पढ़ाई की चिंता कम अपने आधुनिक फैशन वाले कपड़ों की अधिक जरूरत रहती है। संपन्न वर्ग को ऐसा करते देख मध्यम और निम्न वर्ग भी वैसा ही करने को लालायित हो उठा है। 

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कुछ अन्य प्रश्न-उत्तर – Extra Question and Answer

 प्रश्न 1. प्रेमचंद फोटो में कैसे नजर आ रहे थे?

उत्तर : फोटो में प्रेमचंद अत्यंत साधारण-सी वेषभूषा में नजर आ रहे थे। उनके साथ में उनकी पत्नी थी। वे कुर्ता-धोती पहने, सिर पर टोपी लगाए थे। पाँवों में कैनवस के बेतरतीब बंद वाले जूते थे, जिनकी लोहे की पतरी गायब थी। उन्हें किसी तरह बाँध लिया गया था। बाएँ पैर के फटे जूते से उनके पैर की उँगली दिख रही थी।

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प्रश्न 2. ‘गंदे-से-गंदे आदमी की फोटो भी खुशबू देती है’ के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

उत्तर : इस वाक्य के द्वारा लेखक ने समाज में व्याप्त दिखावे और फैशन पर व्यंग्य किया है। लोग अपनी फोटो खिचाते समय दूसरों से कपड़े, टाई, जूते आदि उधार लेते हैं। बाल सेट कराते हैं ताकि उनकी फोटो सुंदर आए। वे अपनी फोटो खिचाते समय अपने बैठने का ढंग, मुख, मुद्रा आदि का विशेष ध्यान रखते हैं, जिससे उनकी फोटो अच्छी आए।

प्रश्न 3. प्रेमचंद ने फटे जूते में भी अपनी फोटो खिंचा ली, पर लेखक ऐसा कभी न करता, क्यों?

उत्तर : प्रेमचंद स्वभाव से सहज तथा सरल थे। वे अपनी गरीबी की स्थिति में खुशी-खुशी जीना सीख गए थे। वे अपनी स्थिति को छिपाना नहीं जानते थे। वे यथार्थ को स्वीकार करने वाले थे, इसलिए जैसे थे, वैसे ही दिखते थे। उन्होंने फटे जूतों के साथ फोटो खिचा ली पर लेखक को उस स्थिति में हीनता और कमी नजर आती है। वह इसे छिपाना चाहता है, इसलिए इस दशा में फोटो न खिंचा पाता। 

प्रश्न 4. रास्ते में पड़ने वाले टीले के विषय में प्रेमचंद और लेखक के दृष्टिकोण किस प्रकार भिन्न हैं?

उत्तर : रास्ते में पड़ने वाले टीले के विषय में प्रेमचंद और लेखक के दृष्टिकोण में मुख्य अंतर यह था कि प्रेमचंद उस टीले को हटाने के लिए उस पर ठोकर मारते रहे। भले ही ऐसा करते हुए उनका जूता फट गया पर लेखक उस टीले से बचकर निकल जाने वालों में था। अर्थात् प्रेमचंद सामाजिक कुरीतियों से लड़ने वालों में थे जबकि लेखक उनसे समझौता करने वालों में था।

प्रश्न 5. ‘प्रेमचंद के फटे जूते (Premchand ke Phate Joote) पाठ में प्रेमचंद और होरी’ की किस कमजोरी की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर : इस पाठ में प्रेमचंद और होरी दोनों की एक ही कमजोरी की ओर संकेत किया गया है। वह कमजोरी है नेम-धरम का पक्का होना। दोनों ने कभी भी धर्म के नियमों का उल्लंघन नहीं किया। वे अपने मूल्यों से कभी नहीं भटके। अपनी-अपनी मर्यादाओं की रक्षा के लिए वे दोनों आजीवन मुसीबतें झेलते रहे।

प्रश्न 6.प्रेमचंद के जीवन से आज के युवाओं को क्या सीख लेना चाहिए? ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ (Premchand ke Phate Joote) पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।

उत्तर : प्रेमचंद अत्यंत सादा जीवन जीने में विश्वास रखते थे। वे बनाव शृंगार और आडंबर से कोसों दूर रहते थे। उन्होंने फोटो खिंचवाने जैसे विशिष्ट मौके पर भी बनावटी वेशभूषा धारण करने का प्रयास नहीं किया। इससे आज के युवा जो फैशनपरस्ती और बनावटी जीवन जीने के लिए निकृष्ट कार्य करने से भी परहेज नहीं करते हैं, को आडंबरहीन एवं साधारण जीवन जीने की सीख लेनी चाहिए।

प्रश्न 7. ‘नेम-धरम की कमजोरी होरी के लिए बंधन बन गए।‘ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : होरी ने आजीवन नेम-धरम का पालन किया। वह नेम-धरम का पक्का था। उसने कभी मर्यादा एवं नैतिकता का साथ नहीं छोड़ा। इन्हीं नियमों और धर्म की आड़ में समाज ने उस पर अत्याचार किए, वहिष्कृत किया, पर वह नेम-धरम के कारण मानवीय मूल्य न त्याग सका और आजीवन गरीबी की मार झेलता रहा। इस प्रकार नेम-धरम उसके लिए बंधन बन गए थे। 

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 : लेखक प्रेमचंद के जूते देखकर क्यों रो पड़ना चाहता है?

उत्तर : लेखक प्रेमचंद की वेषभूषा और जूते देखकर इसलिए रो पड़ना चाहता है क्योंकि इतना महान लेखक होने के बाद भी प्रेमचंद बदहाली की स्थिति से गुजर रहे थे। उसके पास विशेष अवसर पर भी पहनने के लिए अच्छे कपड़े और जूते न थे। लेखक उनकी स्थिति से उत्पन्न दुख को अपने भीतर तक महसूस कर रो देना चाहता है।

प्रश्न 2 : लेखक की नजर प्रेमचंद के जूतों पर क्यों अटक गई?

उत्तर : लेखक की नजर प्रेमचंद के जूतों पर इसलिए अटक गई क्योंकि महान कथाकार, युग प्रवर्तक आदि नामों से जाना जाने वाले लेखक के पास ढंग के जूते भी नहीं हैं। जूतों के फीते बेतरतीब बँधे हैं। उनकी पतरियाँ निकल चुकी हैं। वे जैसे-तैसे बँधे हैं। बाएँ पैर का जूता फटने से उँगली बाहर निकल आई है। ये जूते लेखक की बदहाली बयाँ कर रहे हैं। 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1 : “प्रेमचंद के फटे जूते’ (Premchand ke Phate Joote) पाठ में लेखक द्वारा प्रेमचंद के जूते फटने के क्या कारण बताए गए हैं?

उत्तर : ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ पाठ में लेखक द्वारा उनके जूते फटने का निम्नलिखित कारण बताए गए हैं- 

  • प्रेमचंद के जूते फटने के कारण बनिया द्वारा दिया गया उधार के सामान का वह पैसा है, जिसके तकादे से बचनेके लिए प्रेमचंद दूर का चक्कर लगाकर घर जाते थे।
  • उन्होंने किसी ऐसी चीज जो परत-दर-परत सदियों से जम गई थी, उस पर ठोकर मारकर अपना जूता फाड़ लिया था।
  • शायद प्रेमचंद ने अपने रास्ते में पड़ने वाले किसी टीले पर अपना जूता आजमाया हो, जिसकी ठोकर से उनका जूताफट गया हो। 
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प्रश्न 2 : लेखक ने प्रेमचंद को साहित्यिक पुरखा कहा है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : लेखक ने प्रेमचंद को साहित्यिक पुरखा इसलिए कहा है क्योंकि प्रेमचंद अपने समय के लेखकों में ही नहीं बल्कि संपूर्ण हिंदी साहित्य में सर्वोच्च स्थान रखते थे। वे यथार्थवादी लेखक थे। उन्होंने अपने आसपास, देश, काल तथा समाज की स्थिति का सच्चा तथा वास्तविक चित्रण अपने लेखन में किया है। उनका लेखन इतनी उच्चकोटि का होता था कि बहुत अच्छा लिखने वाले की तुलना उनसे की जाती थी। उन्होंने जिन विषयों पर लेखनी चलाई उनकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है। वे दूरद्वष्टा भी थे, जिन्हें तत्कालीन राजनैतिक, सामाजिक तथा आर्थिक परिस्थितियों का अच्छा ज्ञान था। 

प्रश्न 3 : लेखक और प्रेमचंद के जूतों में क्या अंतर था ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : प्रेमचंद के दाहिने पैर का जूता ठीक है पर बाएँ पैर के जूते में ऊपर छेद हो गया है, जिससे उँगुली बाहर निकल आई है। उनके फीते बेतरतीब बँधे हैं। उनकी पतरी निकल चुकी है। इसके विपरीत लेखक का जूता ऊपर से तो ठीक है पर अंगूठे के नीचे का तला घिस गया है, जिससे उनका अँगूठा घिसकर लहूलुहान हो जाता है। इस तरह पूरा तला घिस जाएगा और उनका पूरा पंजा छिल जाएगा तथा वह चलने में असमर्थ हो जाएगा। इसके अलावा प्रेमचंद का पंजा सुरक्षित है पर लेखक का नहीं।

प्रश्न 4 : ‘तुम भी जूते और टोपी के आनुपातिक मूल्य के मारे हुए थे’ के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

उत्तर : इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने साहित्यकार प्रेमचंद की गरीबी एवं खराब स्थिति पर व्यंग्य किया है। प्रेमचंद उच्चकोटि के साहित्यकार थे, जिन्हें टोपी की तरह सिर पर धारण किया जाना था अर्थात् उनका भरपूर सम्मान किया जाना था, पर समाज में टोपी के बजाए जूते की कीमत अधिक आँकी जाती थी। जो सम्मान के पात्र नहीं है उन्हें मानसम्मान दिया जाता है। यहाँ तो स्थिति यह है कि टोपी को जूते के सामने झुकना पड़ता है। प्रेमचंद उच्चकोटि के साहित्यकार होने के बाद भी अपनी मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी करने में विवश थे। वे गरीबी में जीवन-यापन कर रहे थे। 

प्रेमचंद के फटे जूते का सारांश | Premchand ke Phate Jute Summary | NCERT Solutions for class 9

परसाई जी के सामने प्रेमचंद तथा उनकी पत्नी का एक चित्र है। इसमें प्रेमचंद धोती-कुर्ता पहने हैं तथा उनके सिर पर टोपी है। वे बहुत दुबले हैं, चेहरा बैठा हुआ तथा हड्डियाँ उभरी हुई हैं। चित्र को देखने से ही पता चल रहा है कि वे निर्धनता में जी रहे हैं। वे कैनवस के जूते पहने हैं जो बिल्कुल फट चुके हैं, जिसके कारण ढंग से बँध नहीं पा रहे हैं और बाएँ पैर की उँगलियाँ दिख रही हैं। Read More

         इस पोस्ट के माध्यम से हम क्षितिज भाग कक्षा-9 पाठ-6 (NCERT Solutions for class -9 kshitij bhag-1 chapter – 6)  प्रेमचंद के फटे जूते (Premchand ke Phate Joote) गद्य खंड के प्रश्न-उत्तर के बारे में जाने, जो कि हरिशंकर परसाई (Harishankar Parsai) जी द्वारा लिखित हैं । उम्मीद करती हूँ कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा। पोस्ट अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। किसी भी तरह का प्रश्न हो तो आप हमसे कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकतें हैं। साथ ही हमारे Blogs को Follow करे जिससे आपको हमारे हर नए पोस्ट कि Notification मिलते रहे।

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