Saturday, September 24, 2022
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 9 | चिड़िया की बच्ची प्रश्न उत्तर

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 9 | चिड़िया की बच्ची प्रश्न उत्तर

        आज हम आप लोगों को वसंत भाग-2 के कक्षा-7 का पाठ-9 (NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 9 Vasant Bhag 1 ) के चिड़िया की बच्ची पाठ का प्रश्न-उत्तर (Chidiya Ki Bacchi Class 7 Question Answer) के बारे में बताने जा रहे है जो कि जैनेन्द्र कुमार (Jainendra Kumar) द्वारा लिखित है। इसके अतिरिक्त यदि आपको और भी NCERT हिन्दी से सम्बन्धित पोस्ट चाहिए तो आप हमारे website के Top Menu में जाकर प्राप्त कर सकते हैं।  

चिड़िया की बच्ची प्रश्न उत्तर | Chidiya Ki Bacchi Class 7 Question Answer

कहानी से

प्रश्न 1. किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था?

उत्तर : माधवदास एक सुन्दर अभीरुची का आदमी था । उनकी संगमरमर की बड़ी कोठी तथा एक सुंदर बगीचा था। उनके पास धन की कमी नहीं थी। एक दिन संध्या समय एक मनमोहक सुन्दर चिड़िया उनके बगीचे में आ बैठी, माधवदास उस चिड़िया से बातचीत करते हुए वह कहता है कि- तुम मेरे महल में रहो तुम्हारे लिए सोने का पिंजरा बनावा दूंगा और तुम्हे मालामाल कर दूंगा। इसके अलावा माधवदास स्वयं स्वीकार करता है कि उसके पास कई कोठियाँ, बगीचे और नौकर-चाकर हैं। इन बातों से उनकी संपन्नता का पता चलता है। इसके अलावा वह अकेलेपन को दूर करने के लिए चिड़िया के साथ रहने की इच्छा जताता है। इन बातों से यह पता चलता है कि सारी सुविधाओं के बाद भी माधबदास सुखी नहीं था।

प्रश्न 2. माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है? क्या माधवदास निस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : माधवदास बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है क्योंकि उसे चिड़िया बहुत सुंदर और प्यारी लगी। वह चाहता है कि वह चिड़िया सदा के लिए बगीचे में रह जाए।  इससे माधवदास का अकेलापन भी दूर हो जाएगा । यही कारण है कि माधवदास बार-बार यह बात दुहराता है कि बगीचा तुम्हारा ही है।

माधवदास का यह कहना पूरी तरह से निस्स्वार्थ मन से नहीं था। वह चिड़िया को महल में पिंजरे में बंद करके रखना चाहता था ताकि वह जब चाहे उसकी सुंदरता को निहार सके और उसका चहचहाना सुन सके।

प्रश्न 3. माधवदास के बार-बार समझाने पर भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी। दूसरी तरफ़ माधवदास की नज़र में चिड़िया की जिद का कोई तुक न था। माधवदास और चिड़िया के मनोभावों के अंतर क्या-क्या थे? अपने शब्दों में लिखिए।

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उत्तर : माधवदास बार-बार चिड़िया को सोने के पिंजरे व अपने महल की सुख-सुविधाओं का लालच देता है लेकिन चिड़िया इन बातों को कोई महत्त्व नहीं देती, उसे तो स्वच्छंदता ही पसंद है। उसे माधवदास के सुंदर बगीचे में रहना भी पसंद नहीं है। वह अपने परिवार से भी अलग नहीं होना चाहती। वह सभी बंधनो से मुक्त आजाद रहना चाहती है। शाम होते ही उसे माँ के पास जाने की जल्दी होती है। बंधन में रहना उसका स्वभाव नहीं। वह खुले आसमान में घुमना चाहती थी।

दूसरी तरफ माधवदास की नजर में चिड़िया की ज़िद का कोई तुक न था । माधवदास तो केवल अपने बगीचे की शोभा बढ़ाने और अपना अकेलापन दूर करने के लिए उस चिड़िया को पकड़ना चाहते थे। वे उसे सोने के पिंजरे व अन्य सुख-सुविधाओं का प्रलोभन भी देते हैं, लेकिन चिड़िया के नजरों में इन सब चीजों का कोई महत्त्व नहीं थी।

प्रश्न 4. कहानी के अंत में नन्ही चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा ? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।

उत्तर : कहानी के अंत में नन्ही चिडिया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि माधवदास अपने स्वार्थ के लिए उसे अत्यधिक प्रलोभन देता है। वह चाहता है कि चिड़िया उसके पास रह जाए पर चिड़िया को आजादी पसंद है इसलिए वह माधवदास की बातों को नहीं मानती। अंत में माधवदास उसे अपने नौकर के हाथों पकड़वाना चाहता है लेकिन चिड़िया भाग निकलती है । चिड़िया माधवदास के पिंजड़े में कैद होने से बच जाती है।

प्रश्न 5. ‘माँ मेरी बाट देखती होगी’ – नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है। आप अपने  अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्त्व है?

उत्तर : ‘माँ मेरी बाट देखती होगी’ – नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है क्योंकि उसे अपनी माँ से बहुत प्यार है । हमारी जिंदगी में माँ का स्थान बड़ा ही महत्वपूर्ण है। माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती है। माँ सुख- दुख में सदैव अपने बच्चों के साथ रहती है। माँ हमारे जीवन की सभी परेशानियों को दूर करते हुए सारे दुखों और कष्टों को स्वयं झेल जाना चाहती है। हमें सभी सुख-सुविधाएँ उपलब्ध कराती है तथा दुख की घड़ी में हमें साहस देती है। माँ का प्यार और आशीर्वाद बच्चों की सफलता की मूल चाभी है। अतः हम माँ के कर्ज को कभी नहीं उतार सकते।

प्रश्न 6. इस कहानी का कोई और शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?

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उत्तर : इस कहानी का यदि कोई अन्य शीर्षक देना हो तो मैं ‘छोटी चिड़िया’ शीर्षक दूँगा क्योंकि वह चिड़िया छोटी है। जब माधवदास का नौकर उसे पकड़ने लगता है तो वह बहुत डर गई। वह इतनी तेजी से उड़ी कि सीधे माँ की गोद में आकर रुकी और सारी रात उससे चिपककर सोती रही। वास्तव में वह छोटी बच्ची की तरह डर जाती है।

कहानी से आगे

प्रश्न 1. इस कहानी में आपने देखा कि वह चिड़िया अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चींटियों, ग्रह-नक्षत्रों तथा प्रकृति की अन्य विभिन्न चीजों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।

 उत्तर :  पशु-पक्षी – पशु-पक्षी दिन भर कहीं भी विचरण करते रहें, लेकिन शाम होते-होते वे अपने बसेरों में लौट आते हैं।

दिन-रात – दिन-रात का क्रम प्रकृति में बना हुआ है। दिन के बाद रात और रात के बाद दिन इसमें थोड़ा भी परिवर्तन नहीं होता है।

सूर्य – सूर्य अपने निश्चित समय पर उगता है और निश्चित समय पर डूब जाता है।

 प्रश्न 2. सोचकर लिखिए कि यदि सारी सुविधाएँ देकर एक कमरे में आपको सारे दिन बंद रहने को कहा जाए तो क्या आप स्वीकार करेंगे? आपको अधिक प्रिय क्या होगा-‘स्वाधीनता’ या ‘प्रलोभनोंवाली पराधीनता’? ऐसा क्यों कहा जाता है कि पराधीन व्यक्ति को सपने में भी सुख नहीं मिल पाता। नीचे दिए गए कारणों को पढ़े और विचार करें-

(क) क्योंकि किसी को पराधीन बनाने की इच्छा रखनेवाला व्यक्ति स्वयं दुखी होता है, वह किसी को सुखी नहीं कर सकता।

(ख) क्योंकि पराधीन व्यक्ति सुख के सपने देखना ही नहीं चाहता।

(ग) क्योंकि पराधीन व्यक्ति को सुख के सपने देखने का भी अवसर नहीं मिलता।।

उत्तर :  दुनिया की सारी सुविधाएँ प्राप्त करने के बाद भी मैं एक कमरे में रहना स्वीकार नहीं करुँगा । मुझे सदा स्वाधीनता ही प्रिय होगी न कि ‘प्रलोभनवाली पराधीनता’ क्योंकि पराधीनता का अर्थ है ‘पर के आधीन’ अर्थात् अपनी इच्छा से नहीं दूसरे की इच्छा से कार्य करना।

यह बात सच है कि पराधीन व्यक्ति को स्वप्न में भी सुख नहीं मिलता है क्योंकि पराधीन व्यक्ति दूसरों के अधीन होता है और सुख से कोसो दूर तक रहता है। सुख का एहसास उसके लिए असंभव होता है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1. आपने गौर किया होगा कि मनुष्य, पशु, पक्षी-इन तीनों में ही माँएँ अपने बच्चों का पूरा-पूरा ध्यान रखती हैं। प्रकृति की इस अद्भुत देन का अवलोकन कर अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर : माँ का अपने बच्चो के प्रति प्रेम और ममता की भावना मनुष्यों की तरह जानवरों एवं पशु पक्षियों में भी पाई जाती है। मनुष्य के क्षेत्र में माँ अपने कोख में नौ महीने तक रखती है , फिर अत्यधिक पीड़ा सहकर बच्चों को जन्म देती हैं। माँ हमेशा फिक्रमंद बनी रहती हैं। माँ का अपने बच्चे से ममता और वात्सल्य का यह रिश्ता इतना गहरा है कि प्रत्येक प्राणी में इसके दर्शन होते हैं। चाहे मनुष्य हो या पशु, अपने बच्चों के लिए माताएँ किसी भी मुसीबत से  बैठती हैं। माँ की कोई तुलना नहीं कर सकता।

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भाषा की बात

प्रश्न 1. पाठ में पर शब्द के तीन प्रकार के प्रयोग हुए हैं-

   (क) गुलाब की डाली पर एक चिड़िया आन बैठी।

   (ख) कभी पर हिलाती थी।

   (ग) पर बच्ची काँप-काँपकर माँ की छाती से और चिपक गई।

* तीनों ‘पर’ के प्रयोग तीन उद्देश्यों से हुए हैं। इन वाक्यों का आधार लेकर आप भी ‘पर’ का प्रयोग कर ऐसे तीन वाक्य बनाइए जिसमें अलग-अलग उद्देश्यों के लिए ‘पर’ के प्रयोग हुए हों।

उत्तर : (क) पर (के ऊपर) – छत के ऊपर बंदर बैठा है।।

          (ख) पर (पंख) – चिड़िया की बच्चे के पर निकल आए।

          (ग) पर (लेकिन ) – मैं स्टेशन गया था पर ट्रेन निकल चुकी थी।

 प्रश्न 2. पाठ में तैने, छनभर, खुश करियो-तीन वाक्यांश ऐसे हैं जो खड़ीबोली हिंदी के वर्तमान रूप में तूने, क्षणभर, खुश करना लिखे-बोले जाते हैं लेकिन हिंदी के निकट की बोलियों में कहीं-कहीं इनके प्रयोग होते हैं। इस तरह के कुछ अन्य शब्दों की खोज कीजिए।

उत्तर :   तैनू    –     तुझे

             मन्ने         –   मैंने

           ले लियो   –   ले लेना

           दियो       –   देना

           खानां      –    खाना

         इस पोस्ट के माध्यम से हम वसंत भाग-2 के कक्षा-7 का पाठ-9 (NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 9 Vasant Bhag 1) के चिड़िया की बच्ची पाठ का प्रश्न-उत्तर (Chidiya Ki Bacchi Class 7 Question Answer) के बारे में  जाने जो की जैनेन्द्र कुमार (Jainendra Kumar) द्वारा लिखित हैं । उम्मीद करती हूँ कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा। पोस्ट अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। किसी भी तरह का प्रश्न हो तो आप हमसे कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकतें हैं। साथ ही हमारे Blogs को Follow करे जिससे आपको हमारे हर नए पोस्ट कि Notification मिलते रहे।

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