Thursday, October 6, 2022
HomeClass 9CLASS 9 HindiNCERT Solution for class 9 Lhasa ki aur summary | ल्हासा की...

NCERT Solution for class 9 Lhasa ki aur summary | ल्हासा की ओर का सारांश

ल्हासा की ओर सारांश : Lhasa Ki Aur summary NCERT Solution for Class 9 Hindi Chapter 2

 

          आज हम आप लोगों को NCERT Solution for Class 9 Lhasa ki aur summary क्षितिज भाग 1 ( kshitij bhag 1 ) कक्षा-9 पाठ-2 के ल्हासा की ओर कहानी जो कि राहुल सांकृत्यायन Rahul Sankrityayan द्वारा लिखित है, इस पाठ के सारांश को अपने सरल शब्दों में बताने जा रहे हैं।  

 

ल्हासा की ओर सारांशराहुल सांकृत्यायन : NCERT Solution for class – 9 Lhasa Ki Aur summary – Rahul Sankrityayan

 

          इस पाठ में राहुल सांकृत्यायन जी ने अपनी पहली तिब्बत यात्रा का वर्णन किया है जो उन्होंने सन् 1929-30 में नेपाल के रास्ते की थी। चूंकि उस समय भारतीयो को तिब्बत यात्रा की अनुमति नहीं  थी, इसलिए उन्होंने  यह यात्रा एक भिखमन्गो के छद्म वेश में  की थी। 

          लेखक की यात्रा बहुत वर्ष पहले जब फटीकलिङ्पोङ् का रास्ता नहीं बना था, तो नेपाल से तिब्बत जाने का एक ही रास्ता था। इस रास्ते पर नेपाल के लोगों के साथसाथ भारत के लोग भी जाते थे। यह रास्ता व्यापारिक और सैनिक रास्ता भी था, इसीलिए इसे लेखक ने मुख्य रास्ता बताया है। तिब्बत में जातिपाति, छुआछूत का सवाल नहीं उठता और वहाँ औरतें परदा नहीं डालती है। चोरी की आशंका के कारण भिखमंगो को कोई घर में घुसने नहीं देता। नहीं तो अपरिचित होने पर भी आप घर के अंदर जा सकते हैं और जरूरत अनुसार अपनी झोली से चाय दे सकते हैं, घर की बहु अथवा सास उसे आपके लिए पका देगी। 

यह भी पढ़े-  मेरे संग की औरतें सारांश: NCERT Hindi for Class-9 Mere Sang Ki Aurten Summary

          परित्यक्त चीनी किले से जब वह चले तो एक व्यक्ति को दो चिटें राहदारी देकर थोड़ला के पहले के आखिरी गाँव में पहुँच गए। यहाँ सुमति (मंगोल भिक्ष, राहुल का दोस्त) पहचान तथा भिखारी होने के कारण रहने को अच्छी जगह मिली। पांच साल बाद वे लोग इसी रास्ते से लौटे थे तब उन्हें रहने की जगह नहीं मिली थी और गरीब के झोपड़ी में ठहरना पड़ा था क्योंकि वे भिखारी नहीं बल्कि भद्र यात्री के वेश में थे। 

          यह भी पढ़े : क्षितिज भाग 1 कक्षा 9 पाठ 2 ल्हासा की ओरmain book

          यह भी पढ़े : NCERT Solution ल्हासा की ओर प्रश्न उत्तरQuestion and Answer

          अगले दिन राहुल जी एवं सुमति जी को एक विकट डाँडा थोङ्ला पार करना था। डाँडे तिब्बत में सबसे खतरे की जगह थी। सोलहसत्रह हजार फीट उंची होने के कारण दोनों ओर गाँव का नामोनिशान न था। डाकुओं के छिपने की जगह तथा सरकार की नरमी के कारण यहाँ अक्सर खून हो जाते थे। चूँकि वे लोग भिखारी के वेश में थे इसलिए हत्या की उन्हें परवाह नहीं थी परन्तु उंचाई का डर बना था। दूसरे दिन उन्होंने डाँडे की चढ़ाई घोड़े से की जिसमें उन्हें दक्षिणपूरब ओर बिना बर्फ और हरियाली के नंगे पहाड़ दिखे तथा उत्तर की ओर पहाड़ों पर कुछ बर्फ दिखी। उतरते समय लेखक का घोडा थोड़ा पीछे चलने लगा और वे बाएं की ओर डेढ़ मील आगे चल दिए। बाद में पूछ कर पता चला लङ्कोर का रास्ता दाहिने के तरफ तथा जिससे लेखक को देर हो गयी तथा सुमति नाराज हो गए परन्तु जल्द ही गुस्सा ठंडा हो गया और वे लङ्कोर में एक अच्छी जगह पर ठहरे। 

यह भी पढ़े-  Kallu Kumhar Ki Unakoti Summary | कल्लू कुम्हार की उनाकोटी सारांश | Class 9 Sanchayan Chapter 3

         

         वे अब तिट्टी के मैदान में थे जो की पहाड़ों से घिरा टापूथा सामने एक छोटी सी पहाड़ी दिखाई पड़ती थी जिसका नाम तिट्टीसमाधिगिटी था। आसपास के गाँवों में सुमति के बहुत परिचित थे वे उनसे जाकर मिलना चाहते थे परन्तु लेखक ने उन्हें मना कर दिया और ल्हासा पहुंचकर पैसे देने का वादा किया। सुमति मान गए और उन्होंने आगे बढ़ना शुरू किया। उन्होंने सुबह चलना शुरू नहीं किया था इसीलिए उन्हें कड़ी धूप में आगे बढ़ना पड़ रहा था, वे पीठ पे अपनी चीज़े लादे और हाथ में डंडा लिए चल रहे थे। सुमति एक ओर यजमान से मिलना चाहते थे इसलिए उन्होंने बहाना कर टोकर विहार की ओर चलने को कहा। तिब्बत की जमीन छोटेबड़े जागीरदारों के हाथों में बँटी है। इन जागीरों का बड़ा हिस्सा मठों के हाथ में है।अपनीअपनी जागीर में हर जागीरदार कुछ खेती खुद भी करता है जिसके लिए मजदुर उन्हें बेगार में मिल जाते हैं।

       

        लेखक शेकर की खेती के मुखिया भिक्षु न्मसे से मिले। वहां एक अच्छा मंदिर था जिसमें बुद्ध वचन की हस्तलिखित 103 पोथियाँ रखी थीं जिसे लेखक पढ़ने में लग गए इसी दौरान सुमति ने आसपास अपने यजमानों से मिलकर आने के लिए लेखक से पूछा जिसे लेखक ने मान लिया, दोपहर तक सुमति वापस आ गए। चूँकि तिट्टी वहां से ज्यादा दूर नहीं था इसीलिए उन्होंने अपना सामान पीठ पर उठाया और न्मसे से विदा लेकर चल दिए। 

यह भी पढ़े-  Mati Wali Question and Answer | माटी वाली प्रश्न-उत्तर | NCERT Solution for Class-9

          सुमित का परिचयवह लेखक को यात्रा के दौरान मिला जो एक मंगोल भिक्षु था। उनका नाम लोब्ज़टोख था। इसका अर्थ हैं सुमति प्रज. अतः सुविधा के लिए लेखक ने उसे सुमति नाम से पुकारा हैं। 

       

      इस पोस्ट में हमने जाना NCERT Solution for class 9 kshitij bhag-1 chapter 2 Lahsa Ki Aur कहानी के सारांश के बारे में। उम्मीद करती हु आपको हमारा ये पोस्ट पसंद आया होगा। पोस्ट अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्त के साथ शेयर करन न भूले। किसी भी तरह का सवाल हो तो आप हमसे कमेन्ट बॉक्स में पुच्छ सकतें हैं। साथ ही हमारे Blogs को Follow जिससे आपको हमारे हास नए पोस्ट कि Notification मिलते रहेगी।

       हमारे हर पोस्ट आपको Video के रूप मे भी हमारे YouTube चेननल Education 4 India पे भी मिल जाएगी।

 

 

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments