Thursday, October 6, 2022
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Hindi Class 10 Chapter 1 : Surdas ke Pad Class 10 Question Answer

           आज हम आप लोगों को कृतिका भाग-2 के कक्षा-10  का पाठ-1 (NCERT Solutions For Hindi Class 10 Chapter 1) के सूरदास के पद पाठ का प्रश्न-उत्तर (Surdas ke Pad Hindi Question Answer) के बारे में बताने जा रहे है जो कि सूरदास (Surdas) द्वारा लिखित है। इसके अतिरिक्त यदि आपको और भी NCERT हिन्दी से सम्बन्धित पोस्ट चाहिए तो आप हमारे website के Top Menu में जाकर प्राप्त कर सकते हैं। 

Hindi Class 10 Chapter 1 : Surdas ke Pad Class 10 Question Answer

सूरदास के पद पाठ का प्रश्न-उत्तर

प्रश्न : 1. गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

उत्तर :- गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में यह व्यंग्य निहित है कि वे उद्धव के हृदय में प्रेम की भावना का अभाव है । यही कारण है कि  कृष्ण से बिछड़े हुए गोपियों की विरह वेदना को वे समझ नही पा रहे है। गोपियों द्वारा उद्धव की भाग्यवान कहना ,ऐसा लगता है कि वे प्रशंसा कर रही हैं किंतु वास्तव में कहना चाह रही हैं कि उद्धव बड़े अभागे है कि वे प्रेम का अनुभव नहीं कर सके। न किसी के हो सके, न किसी को अपना बना सके।इसलिए गोपियाँ व्यंग्य रुप में उद्धव को भाग्यवान कहती है।

प्रश्न : 2. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?

उत्तर :-  उद्धव के व्यवहार की तुलना दो वस्तुओं से की गई है

  1. कमल के पत्ते से जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता है।
  2. तेल में डूबी गागर से जो तेल के कारण पानी का उसपर कोइ असर नही होता।

प्रश्न : 3. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं?

उत्तर :-  गोपियों ने निम्नलिखित उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं ।

उद्धव जब  मथुरा से गोपियों के लिए योग संदेश लेकर आते हे, तब गोपियाँ उन्हहें उलाहने देते हुए कहती है कि उन्होनों शायद किसी से प्रेम नही किया और ना ही उन्हे किसी से बिछुड़ने का एहसास है।

वे कहती है कि उद्धव आप पहले से ही चालाक थे और अब कृष्ण का पाठ पढ़कर आए है। वे कहती है कि आप जाकर कृष्ण से कहीएगा कि हमने भी अपना मन पा लिया है, जो कृष्ण जाते वक्त ले गए थे ।

प्रश्न : 4. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?

उत्तर :-  श्रीकृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियाँ पहले से विरहाग्नि में जल रही थीं। उनकी विरह वेदना केवल कृष्ण को अपने समक्ष देखकर ही शांत हो सकती थी । वे श्रीकृष्ण के प्रेम-संदेश और उनके आने की प्रतीक्षा कर रही थीं। ऐसे में श्रीकृष्ण ने उन्हें योग साधना का संदेश भेज दिया जिससे उनकी मन की विरह-वेदना कम होने के बजाय और भी बढ़ गई । इस तरह उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेशों ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम किया।

प्रश्न : 5. ‘मरजादा न लहीके माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?

उत्तर :-  ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कृष्ण द्वारा प्रेम की मर्यादा न रखने की बात की जा रही है । कृष्ण ने गोपियों से प्रेम निभाने की बजाय उनके लिए नीरस योग-संदेश भेज दिया, जो कि एक धोखा था। गोपियाँ कृष्ण से मिलना चाहती थी लेकिन कृष्ण स्वयं आने के बदले उद्धव के द्वारा योग संदेश भेजते है इसी छल को गोपियों ने मर्यादा न रखने की बात कही है ।

प्रश्न : 6. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?

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उत्तर :-  गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपनी अनन्य प्रेम को निम्नलिखित रूपों में अभिव्यक्त करती हैं- श्री कृष्ण के गोकुल  से मथुरा चले जाने पर गोपियाँ व्याकुल हो उठती है।गोपियों के अनुसार उनकी मन की स्थिति गुड़ से चिपटी चींटियों जैसी हैं जो किसी भी दशा में कृष्ण प्रेम से दूर नहीं रह सकती हैं। वे श्रीकृष्ण को हारिल की लकड़ी के समान मानती हैं। वे श्रीकृष्ण के प्रति मन-कर्म और वचन से समर्पित हैं। वे सोते-जागते, दिन-रात कृष्ण का जाप करती हैं। उन्हें कृष्ण प्रेम के आगे योग संदेश कड़वी ककड़ी जैसी लगती है। वे मन ,क्रम ,वचन से कृष्ण को दृढ़ता से अपनाए हुए है।

प्रश्न : 7. गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?

उत्तर :-  गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा ऐसे लोगों को देने की बात कही है कि वे योग की शिक्षा ऐसे लोगों को दें जिनके मन चंचल है, स्थिर नहीं हैं। जिनके हृदयों में कृष्ण के प्रति सच्चा प्रेम नहीं है। जिनके मन में भटकाव है, दुविधा है, भ्रम है ।वे कहती है की हमारा मन पहले से ही स्थिर और कृष्ण के प्रेम मे एकाग्र है।

प्रश्न : 8. प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।

उत्तर :-  सूरदास द्वारा रचित प्रस्तुत पदों में गोपियों की कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ प्रेम, भक्ति, आसक्ति और स्नेहमयता प्रकट हुई है। गोपियाँ अपने मन ,क्रम,वचन से कृष्ण को अपनाएँ हुए है। जिस पर किसी अन्य का असर का कोई प्रभाव नही रह जाता है। गोपियों पर श्रीकृष्ण के प्रेम-भक्ती का ऐसा गहरा प्रभाव पड़ा है कि खुद कृष्ण का भेजा योग संदेश उन्हे कड़वी ककड़ी और दुखदायी लगता है, जिसे वे किसी भी दशा में अपनाने को तैयार नहीं हैं।

प्रश्न : 9. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?

उत्तर :-  गोपियों के अनुसार नीति के मार्ग पर चलते हुए प्रजा के हित की चिन्ता करना, उनके कष्टों का निवारण करना तथा उनके सुखों के लिए कार्य करना ही राजा का धर्म होना चाहीए।

प्रश्न : 10. गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन-से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं?

उत्तर :-  गोपियों को कृष्ण में ऐसे अनेक परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन श्रीकृष्ण से वापस पा लेने की बात कहती है –

क) श्रीकृष्ण ने अब राजनीति पढ़ लिया है जिससे उनके व्यवहार बहुत बदलाव आ गया है।

ख) श्रीकृष्ण को अब प्रेम की मर्यादा पालन का ध्यान नहीं रहा ।

ग) श्रीकृष्ण को अब राजधर्म याद नही रहा ।

घ) दूसरों को नीति का मार्ग दिखाने वाले कृष्ण अब स्वयं अनीति पर उतर आए हैं।

प्रश्न : 11. गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए?

उत्तर :-  श्री कृष्ण गोपियों को गोकुल में छोड़कर मथुरा चले जाने पर गोपियों की प्रेम विरह वेदना बढ़ जाती है। श्री कृष्ण गोपियों की प्रेम विरह वेदना को शांत करने के लिए उद्धव के माध्यम से योग संदेश भेजवाते है। लेकिन गोपियाँ बड़ी चतुराई तथा वाकपटुता से उद्धव को निरुत्तरकर देती है।

गोपियों की वाक्चातुर्य की निम्न विशेषताएँ है-

क) गोपियों द्वारा श्री कृष्ण के लौकिक प्रेम भावना का  प्रदर्शन।

ख) विभिन्न लौकिक दृष्टांतों द्वारा ज्ञान का प्रमाण प्रस्तुत करना।

ग) निपुण और कुशल वाक्चातुर्य का प्रदर्शन आदि।

प्रश्न : 12. संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सूर के भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ बताइए ?

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उत्तर :-  सूरदास द्वारा रचित भ्रमरगीत से संकलित प्रस्तुत चार पदों के आधार पर भ्रमरगीत की कुछ निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

क) प्रस्तुत पदो में श्रृंगार रस का सुन्दर प्रयोग किया गया है।

ख) सुरदास ने उद्धव को भौरे के साथ तुलना किया है, जिसके गीत गोपियों के लिए अप्रसांगिक है।

ग) कृष्ण के प्रति गोपियों की प्रेम की गहराई को अभिव्यक्त किया गया है।

घ) गोपियों द्वारा यहाँ उद्धव को राजधर्म याद दिलाया जाना सुरदास की लोकधर्मिता को दर्शाता है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न : 13. गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए।

उत्तर :-  मेरी कल्पना के अनुसार गोपियों द्वारा उद्धव को यह तर्क दिया जाना चाहीए कि- ऊधौ! यदि यह योग-संदेश इतना ही प्रभावशाली है तो कृष्ण से कहना कि कुब्जा को यह योग-संदेश देना चाहिए। कृष्ण को यह समझना चाहीए कि योग-मार्ग कठिन है। इसमें कठिन साधना करनी पड़ती है। हम गोपियाँ कोमलांगी और मधुर मन वाली हैं। हमसे यह कठोर साधना कैसे हो पाएगा । हमारे लिए यह असंभव है।

प्रश्न : 14. उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे; गोपियों के पास ऐसी कौन-सी शक्ति थी जो उनके वाक्चातुर्य में मुखरित हो उठी?

उत्तर :-  उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे परंतु उन्हें सांसारिकता तथा व्यावहारिकता का अनुभव नहीं था। गोपियों यह भलि-भाँति जानती थी कि उद्धव को श्रीकृष्ण से प्रेम नहीं हो सका, इसलिए उन्होंने कहा था, ‘प्रीति नदी में पाउँ न बोरयो’। उद्धव के पास इसका कोई जवाब न था। इससे गोपियों का वाक्चातुर्य मुखरित हो उठा। गोपियाँ कृष्ण के प्रति असीम, अथाह लगाव रखती थी। जबकि उद्धव को प्रेम जैसी भावना से कोई मतलब न था। उद्धव को इस स्थिति में चुप देखकर उनकी वाक्चातुर्य और भी मुखितर हो उठी।

प्रश्न : 15. गोपियों ने यह क्यों कहा कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं? क्या आपको गोपियों के इस कथन का विस्तार समकालीन राजनीति में नज़र आता है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :-  जब गोपियों ने देखा कि जिस कृष्ण की वे बहुत समय से प्रतीक्षा कर रही थीं, वे आने की आस देकर भी नहीं आए। उसकी जगह कृष्ण से दूर करने वाला योग-संदेश उद्धव के द्वारा भेजा गया तो उन्हें इसमें कृष्ण की एक चाल नज़र आई। वे इसे अपने साथ छल समझने लगीं। इसीलिए उन्होंने आरोप लगाया कि “हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।“आज की राजनीति तो सिर से पैर तक छलावा से भरी हुई है। किसी को किसी भी राजनेता के वादों पर विश्वास नहीं रह गया है। आज़ादी के बाद से गरीबी हटाओ का नारा लग रहा है किंतु तब से लेकर आज तक गरीब हटते गए लेकिन गरिबी नही हटी,बल्की वृद्धि ही हुई है। इसलिए गोपियों का यह कथन समकालीन राजनीति पर खरा उतरता है।

पाठेतर सक्रियता

प्रश्न : 16. प्रस्तुत पदों की सबसे बड़ी विशेषता है गोपियों की वाग्विदग्धता। आपने ऐसे और चरित्रों के बारे में पढ़ा या सुना होगा जिन्होनें अपने वाक्चातुर्य के आधार पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई; जैसे-बीरबल, तेनालीराम, गोपालभाँड, मुल्ला नसीरुद्दीन आदि । अपने किसी मनपसंद चरित्र के कुछ किस्से संकलित कर एक अलबम तैयार करें।

उत्तर :-  उक्त प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं करे।

प्रश्न : 17. सूर रचित अपने प्रिय पदों को लय व ताल के साथ गाएँ ।

उत्तर :-  उक्त प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं करे।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

प्रश्न:1.गोपियों ने कृष्ण को हारिल की लकड़ी के समान क्यों बताया है?

उत्तर :-  गोपियों ने कृष्ण को हारिल की लकड़ी के समान इसलिए बताया है क्योंकि जिस प्रकार हारिल पक्षी अपने पंजे में दबी लकड़ी को आधार मानकर उड़ता है उसी प्रकार गोपियों ने अपने जीवन का आधार कृष्ण को मान रखा है।

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प्रश्न:2.‘कमल के पत्तेऔर तेल लगी गागरकी क्या विशेषता होती है?

उत्तर :-  .‘कमल के पत्ते’ और ‘तेल लगी गागर’ की यह विशेषता होती है कि कमल का पत्ता इतना चिकना होता है कि पानी की बूंद उस पर नहीं ठहर सकती है । इसी प्रकार तेल लगी गागरी को जब पानी में डुबोया जाता है तो उसपर पानी का कोई असर नहीं होता है ।

प्रश्न:3.गोपियों ने स्वयं को अबला और भोली क्यों कहा है?

उत्तर :-  गोपियों ने स्वयं को अबला और भोली कहा है क्योंकि गोपियाँ कृष्ण से दूर रहकर भी उनके प्यार में अनुरक्त हैं। वे स्वयं को कृष्ण के प्रेमबंधन में बँधी पाती हैं। वे चाहकर भी कृष्ण के प्रेम को भुला नही सकती। चाहे कृष्ण जितना भी चाल चल लें।

प्रश्न:4.गोपियाँ किस आधार पर विरह व्यथा सह रही थीं ?

उत्तर :-  श्रीकृष्ण मथुरा जाते समय गोपियों से कहा था कि वे जल्द से जल्द ब्रज वापस आ जाएँगे। उसी आने की अवधि को आधार बनाकर गोपियाँ तन और मन की विरह व्यथा सह रही थीं और कृष्ण का इंतजार भी कर रही थी।

प्रश्न:5. गोपियों की कृष्ण की आने की आशा निराशा में कैसे बदल गई?

उत्तर :-  गोपियाँ अपनी विरह-वेदना को झेलने को विवश थीं, क्योंकी श्रीकृष्ण से उनकी मिलने की पुर्ण आशा थी पर जब कृष्ण ने ही उद्धव के हाथों योग-संदेश भिजवाया तो उनकी यह आशा निराशा में बदल गई।

प्रश्न 6. गोपियों ने कृष्ण को राजधर्म की बात क्यों याद दिलाई?

उत्तर :-  गोपियों ने कृष्ण को राजधर्म की बात इसलिए याद दिलाई क्योंकि श्रीकृष्ण प्रेम-भक्ती में ओतप्रोत गोपियों के लिए योग संदेश भेजकर उनके साथ अनीति भरा आचरण कर रहे थे। उनका मानना था कि राजा को अपनी प्रजा की भलाई की बात सदैव स्मरण रखना चाहीए। जबकि कृष्ण ऐसा नहीं कर रहे थे।

प्रश्न 7. सूरदास का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?

उत्तर :-  सूरदास का जन्म सन् 1478 में दिल्ली के पास सीही नामक स्थान में हुआ था।

प्रश्न 8. सूरदास के गुरू का नाम क्या था ?

उत्तर :-  सूरदास के गुरू का नाम महाप्रभु वल्लभाचार्य था।

प्रश्न 9. वात्सल्य और श्रृंगार के श्रेष्ठ कवि किसे माना जाता है?

उत्तर :-  वात्सल्य और श्रृंगार के श्रेष्ठ कवि सूरदास को माना जाता है।

प्रश्न 10. सूरदास  द्वारा रचित मुख्य तीन ग्रन्थों के नाम लिखिए।

उत्तर :-  सूरसागर, साहित्य लहरी और सूरसारावली ।

प्रश्न 11. सूरदास का मृत्यु कब हुआ?

उत्तर :-  सन् 1583 में पारसौली में सूरदास का  मृत्यु  हुआ था।

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          इस पोस्ट के माध्यम से हम कृतिका भाग-2 के कक्षा-10  का पाठ-1 (NCERT Solutions For Hindi Class 10 Chapter 1) के सूरदास के पद पाठ का प्रश्न-उत्तर (Surdas ke Pad Hindi Question Answer) के बारे में  जाने जो की सूरदास (Surdas) द्वारा लिखित है। उम्मीद करती हूँ कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा। पोस्ट अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। किसी भी तरह का प्रश्न हो तो आप हमसे कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकतें हैं। साथ ही हमारे Blogs को Follow करे जिससे आपको हमारे हर नए पोस्ट कि Notification मिलते रहे।

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