जॉर्ज पंचम की नाक प्रश्न-उत्तर | George Pancham Ki Naak Question Answer

George Pancham Ki Naak Question Answers | जॉर्ज पंचम की नाक प्रश्न-उत्तर | NCERT Solutions For Class 10 Hindi Chapter 2 Kritika

          आज हम आप लोगों को कृतिका भाग-2 के कक्षा-10  का पाठ-2 (NCERT Solutions for Class-10 Hindi Kritika Bhag-2 Chapter-2) के जॉर्ज पंचम की नाक पाठ का प्रश्न-उत्तर (George Pancham Ki Naak Question Answer) के बारे में बताने जा रहे है जो कि कमलेश्वर (Kamleshwar) द्वारा लिखित है। इसके अतिरिक्त यदि आपको और भी NCERT हिन्दी से सम्बन्धित पोस्ट चाहिए तो आप हमारे website के Top Menu में जाकर प्राप्त कर सकते हैं।       

प्रश्न 1. सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिन्ता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है?

उत्तर : सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) लगाने को लेकर जो चिन्ता या बदहवासी दिखाई देती है वह सदियों की परतंत्रता की छाप है। चाटुकारिता (खुशामद या चापलूसी) उनके तन-मन में विद्यमान है और जहाँ चाटुकारिता का भाव होता है वहाँ फिर अपने सम्मान का कोई भी महत्व नहीं होता है। सरकारी तंत्र जॉर्ज पंचम की नाक के लिए चिन्तित है जिसने न जाने कितने ही कहर हम सब पर ढहाए। यहाँ सरकार उसके अत्याचारों को याद न कर उसके सम्मान में जुट जाता है।

           इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वतंत्र होने पर भी परतंत्रता की आदत या चाटुकारिता की आदत अभी समाप्त नहीं हुई है। सरकारी तंत्र अपनी मर्यादा को पीछे रखकर उस जॉर्ज नामक व्यक्ति के नाक के लिए चिन्तित है जिसका कोई महत्व नहीं है। इस तरह की सरकारी तंत्र अयोग्यता, अदूरदर्शिता, मूर्खता, चाटुकारिता को दर्शाती है।

प्रश्न 2. रानी एलिजाबेथ के दरजी की परेशानी का क्या कारण था? उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएंगे?

उत्तर : रानी एलिज़ाबेथ का दरज़ी रानी के दौरे से अच्छी तरह परिचित था। दर्जी जानता था कि रानी पाकिस्तान, भारत और नेपाल का दौरा करेंगी, तो उस देश के अनुकूल ही उन्हें वेश धारण करना होगा। दरज़ी परेशान था कि कौन-कौन से देश में कैसा ड्रैस पहनेगी? इस बात की दरज़ी को, कोई जानकारी नहीं थी, न कोई निर्देश था।

उसकी चिन्ता अवश्य ही विचारणीय थी। प्रशंसा की कामना हर व्यक्ति को होती है। उसका सोचना था जितना अच्छा वस्त्र होगा उतनी ही मेरी ख्याति होगी। वह यह भी अच्छी तरह जानता था कि रानी से जुड़े सभी समाचार अखबार में छपता है। जब रानी के कुत्तों तक की खबरें छप रही हैं, तो रानी की इच्छा के अनुकूल ड्रेस सिलने पर मेरी ख्याति हो जाएगी। इस तरह उसकी चिन्ता उचित ही थी।

प्रश्न 3. “और देखते ही देखते नई दिल्ली की काया पलट होने लगी।” नई दिल्ली के कायापलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किएगए होंगे?

उत्तर : रानी एलिज़ाबेथ के स्वागतार्थ में नई दिल्ली की कायापलट के निम्नलिखित प्रयत्न किए गए होंगे-

  1. सरकारी भवनों की साफ-सफाई की गयी होगी और साथ में रंग-रोगन कर उन्हें चमकाया भी गया होगा।
  2. जगह-जगह पर पड़े हुए कूड़े-करकट के ढेर को उठाने का प्रयास किया गया होगा। दर्शनीय स्थलों को सजाया भी गया होगा।
  3. रानी की नज़र कहीं झोंपड़ी, झुग्गी-बस्तियों पर न पड़ जाये। यह सोच कर उनको दूसरे जगह स्थानान्तरित किया गया होगा।
  4. सभी सड़कों को साफ-सुथरा किया गया होगा। प्रमुख स्थानों पर सजे हुए तोरण द्वार बनाए गए होंगे, जगह-जगह बैनरऔर बोर्ड लगाए गए होंगे।
  5. जगह-जगह पर स्वागत समारोह की तैयारियाँ की गई होंगी। कहीं पर स्कूल के बच्चे हाथ में झण्डे-झण्डियाँ लिए हुएहाथ हिलाकर स्वागत कर रहे होंगे, तो कहीं पर नृत्य, वाद्ययन्त्रों से स्वागत किया होगा।
  6. कहीं कहीं प्रमुख स्थानों पर देश के सम्मानित नेताओं का झुण्ड हाथ में पुष्पहार और बुके आदि लिए खड़े होंगे औरफोटो लिए जाने के कारण एलिजाबेथ का स्वागत करने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे होंगे।
  7. सुरक्षा की दृष्टि से स्थान-स्थान पर पुलिस की व्यवस्था की गई होगी।
  8. सरकारी भवनों पर झण्डे लगाए गए होंगे।
  9. जगह-जगह पर ब्रिटेन और भारत की मित्रता के श्लोगन वाले पोस्टर लगाए गए होंगे।

कृतिका भाग-2 ( गद्य खंड )

सारांश  प्रश्न-उत्तर 
अध्याय- 1 माता का आँचल प्रश्न-उत्तर 

NCERT / CBSE Solution for Class 9 (HINDI)

प्रश्न 4 . आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान सम्बन्धी आदतों आदि के वर्णन का दौर चलपड़ा है –

(क) इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?

(ख) इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?

उत्तर : (क) आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे, खान-पान सम्बन्धी आदतों को व्यर्थ ही वर्णन करने का दौर चल पड़ा है, इससे जन-सामान्य की आदतों में भी परिवर्तन कर दिया है। ऐसी बातों को बार-बार चर्चित कर उसमें विशेष रुचि लेते दिखाई देते हैं। इस प्रकार की पत्रकारिता छिछली है। उसके प्रति विचार हैं कि

  1. इस तरह की बातों को इकट्ठा करना और बार-बार दोहराकर महत्वपूर्ण बना देना पत्रकारिता का प्रशंसनीय कार्यनहीं है। इससे जन-सामान्य का कोई सम्बन्ध नहीं है।
  2. पत्रकारिता में बहुत से ऐसे व्यक्तियों के चरित्र को भी महत्व दे दिया जाता है, जो खुद के चरित्र पर तो कभी खरे उतरतेनहीं हैं परन्तु चारों तरफ चर्चा में बने रहने के कारण असहज कार्य करते हैं जो समाचार पत्रों में छाप दिए जाते हैं।

(ख) चर्चित व्यक्तियों के बारे में बार-बार की गई व्यर्थ-चर्चाएँ युवा पीढ़ी पर बुरा प्रभाव डालती हैं। उन सभी चर्चित व्यक्तियों की नकल करने का प्रयास युवा पीढ़ी करती है , उन्हीं की संस्कृति में जीने की बढ़ती हुई इच्छाएँ भी युवा पीढ़ी के मन में ऐसा भयंकर रूप धारण कर लेती हैं जिससे युवा पीढ़ी के ऊपर दुष्प्रभाव पड़े बिना नहीं रहता है। ये युवा पीढ़ियाँ अपने सामाजिक व्यवहार और लक्ष्य को भूलकर व्यर्थ की सजावट में अपना समय और धन खर्च करने लगती है। सभी युवा पीढ़ी पत्रकारिता से जुड़े इस दुष्परिणाम से अच्छी तरह सुपरिचित हैं किन्तु उन्हें उनके भविष्य या देश की बिगड़ती हालत से कोई लेना-देना नहीं रह गया है-ऐसा लगता है। युवा पीढ़ी को उच्छृखल बनाने या उनके उद्देश्य से भटकाने के लिए ही अधिक से अधिक घिनौने रंगीन समाचार चित्र प्रस्तुत किए जाते हैं। युवा पीढ़ी पर इसका कोई अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 5.  जार्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?

उत्तर : जार्ज पंचम की खम्बे की नाक को फिर से लगाने के लिए जो सराहनीय प्रयास किए गए वे सब निश्चित ही हैरान करने वाले कार्य थे जो इस प्रकार हैं-

  1. मूर्तिकार ने फाइलें ढूंढ़वाईं, जिससे इस पत्थर के स्थान का पता चल सके।
  2. फाइल के न मिलने पर मूर्तिकार उस तरह का पत्थर ढूँढ़ने के लिए हिन्दुस्तान के हर पहाड़ पर गया। उसने हिन्दुस्तानका चप्पा-चप्पा खोजा।
  3. मूर्तिकार ने अपने देश में स्थित सभी नेताओं के मूर्तियों की नाक को नापा। जिसके लिए वह देश के उन सब नेताओं की मूर्तियों को ढूँढ़ते-ढूँढते साथ में नाक को नापते-नापते देश के हर एक प्रान्त और जिला में गया।
  4. बिहार के सेक्रेटरिएट के सामने सन् बयालीस में शहीद हुए बच्चों की स्थापित मूर्तियों की नाक को नापा, परन्तु सभीबड़ी निकलीं।
  5. अन्त में देश के किसी जिन्दा व्यक्ति की जिन्दा नाक लगाने का प्रयत्न किया गया और यह प्रयत्न सफल भी रहा, अन्त मेंजिंदा व्यक्ति की नाक लगा दी गई।

प्रश्न 6. प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए हैं जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं। उदाहरण केजिन्दा नाक लगा दी गई। लिए- “फाइलें सब कुछ हजम कर चुकी हैं।” सब हुक्कामों ने एक दूसरे की तरफ ताका। पाठ में आए ऐसे अन्यकथन छाँटकर लिखिए।

उत्तर : पाठ में आए ऐसे व्यंग्यात्मक घटनाएं वर्तमान व्यवस्था पर चोट करते हैं-

  1. इंग्लैंड के अखबारों की जो कतरनें होती थी वह हिन्दुस्तानी अखबारों में दूसरे दिन चिपकी नजर आती थीं जिसमें लिखा था कि रानी ने हल्के नीले रंगका सूट बनवाया है।
  2. शंख पूरे इंग्लैण्ड में बज रहा था, गूंज हमारे पूरे हिन्दुस्तान में आ रही थी।
  3. सड़के जवान हो गईं, बुढ़ापे की धूल साफ हो गई। इमारतों ने नाजनीनों की तरह शृंगार किया…। सब चमक उठीं।
  4. दिल्ली में सब था… सिर्फ जॉर्ज पंचम की लाट पर नाक नहीं थी।
  5. पहरेदार गश्त लगते रहे और लाट की नाक चली गई।
  6. देश के खैर ख्वाहों की मीटिंग बुलाई गई।
  7. अगर यह नाक नहीं है तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी।
  8. पुरातत्व विभाग की सभी फाइलों के पेट चीरे गए, परन्तु कुछ भी पता नहीं चला।

प्रश्न 7. नाक मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक है। यह बात पूरी व्यंग्य रचना में किस तरह उभर कर आई है? लिखिए।

उत्तर : नाक सदा से ही मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा का प्रतीक रही है। प्रतिष्ठा के प्रतीक इसी नाक को इस व्यंग्य रचना का विषय बनाया गया है, साथ ही देश की सभी सरकारी व्यवस्थाओं, मंत्रियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गुलामी भरी मानसिकता पर कठोर प्रहार किया गया है। देश को स्वतंत्र हुए आज काफी समय बीत गए फिर भी अधिकारीयों एवं कर्मचारीयों उसी गुलामी भारी मानसिकता में जीवन जी रहे हैं। जॉर्ज पंचम के लाट की इस टूटी नाक की किसी को भी चिंता नहीं थी, परन्तु एलिजाबेथ के भारत आने के कारण अचानक से यह टूटी नाक महत्त्वपूर्ण हो उठी और सरकारी तंत्र तथा अन्य कर्मचारी भी चिंतित हो उठे, उस नाक को फिर से लगाने के लिए हर प्रकार का जोड़-तोड़ कोशिश करने में लग गए। उनके बीच मचा हुआ हड़कंप देखने लायक था। यह निश्चित रूप से गुलामी की मानसिकता का ही असर था कि वे जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) को अब और देर तक टूटी हुई नहीं देख सकते थे, न ही इस दशा में एलिजाबेथ को दिखाना चाहते थे।

प्रश्न 1. अखबारों ने जिन्दा नाक लगने की खबर को किस तरह से प्रस्तुत किया?

उत्तर : अखबारों में जिन्दा नाक लगने की खबर को ऐसा पत्थरवत् बना दिया गया कि अखबार वालों ने खबर छाप दी कि जॉर्ज पंचम की जिन्दा नाक लगा दी गई है, वो भी इस प्रकार की नाक जो कहीं से भी पत्थर की नाक नहीं लगती है। इस तरह जिन्दा नाक लगाने की खबर को शब्दों के ताल-मेल में वाक्पटुता से छिपा लिया गया।

प्रश्न 9.  जॉर्ज पंचम की लाट पर किसी भी भारतीय नेता, यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात सेलेखक किस ओर संकेत करना चाहता है।

उत्तर : जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर किसी भी भारतीय नेताओं, यहाँ तक कि बिहार के सेक्रेटरिएट के सामने सन् बयालिस में शहीद हुए भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक का संकेत है कि जिस जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) के लिए सरकारी तन्त्र के सभी हुक्काम चिन्तित थे। उसकी नाक तो अपने देश के महापुरुषों की बात तो दूर, देश के लिए शहीद हुए बच्चों की नाक से भी छोटी थी जिसके लिए इतना तहलका मचा रखा था। इस तरह जॉर्ज पंचम की गणना गोखले, तिलक, शिवाजी, गाँधी, पटेल, बोस की तुलना में नगण्य थी।

प्रश्न 10. “नई दिल्ली में सब था… सिर्फ नाक नहीं थी।” इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है ?

उत्तर नई दिल्ली में सब था, सिर्फ नाक नहीं थी-यह वाक्य कहकर लेखक यह स्पष्ट कराना चाहता है कि भारत के स्वतन्त्र होने पर वह सर्वथा सम्पन्न हो चुका था, कहीं भी विपन्नता नहीं थी। अभाव था तो केवल आत्मसम्मान का, स्वाभिमान का। सम्पन्न होने पर भी देश परतन्त्रता की मानसिकता से मुक्त नहीं हो सका है। अंग्रेज का नाम आते ही हीनता का भाव उत्पन्न होता था कि ये हमारे राजा (शासक) रहे हैं। गुलामी का कलंक पीछा नहीं छोड़ रहा है। इसलिए लेखक कहता है कि दिल्ली में सिर्फ नाक नहीं थी।

प्रश्न 11. जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) लगने वाली खबर के दिन अखबार चुप क्यों थे?

उत्तर : जॉर्ज पंचम के लाट पर जिन्दा नाक लग जाने के कारण अखबार वाले लज्जित हो गए थे। जिस जॉर्ज पंचम की तुलना छोटे बच्चे से भी नहीं की जा सके और जिसके अत्याचार को इतिहास भी शायद भूला नहीं था, उस जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर अपने सम्मान की नाक कटवा कर जिन्दा नाक फिट कर दी गई। यह कृत्य चुल्लूभर पानी में डूबने जैसा था। यह भाव देशवासियों को कचोट रहा हो, मातम का दिन समझा हो इस कारण उस दिन कहीं भी किसी उद्घाटन की खबर नहीं थी, किसी व्यक्ति ने कहीं भी फीता नहीं काटा था। किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा नहीं हुई थी। कहीं भी किसी भी व्यक्ति का अभिनन्दन नहीं हुआ था, किसी प्रकार की मान-पत्र भेंट करने की नौबत नहीं आई थी। किसी हवाई अड्डे या स्टेशन पर स्वागत समारोह नहीं हुआ था। यह दिन भारतीयों के आत्मसम्मान पर चोट करने वाला था, इसलिए आज के दिन अखबार खाली थे।

जॉर्ज पंचम की नाक कुछ और प्रश्न | George Pancham Ki Naak Extra Questions Answers

प्रश्न 1. जॉर्ज पंचम की नाक की लम्बी दास्तान क्या है?

उत्तर : जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) की बहुत लम्बी दास्तान है जिस नाक के लिए अखबारों के पन्ने रंगीन हो गए थे। बहस इस बात पर हो रही थी कि जॉर्ज पंचम की नाक को रहने दिया जाए या हटा दिया जाए। कुछ लोग इसके पक्ष में बात कर रहे थे तो कुछ विपक्ष में थे और ज्यादा लोगों की संख्या तो खामोशी में थी। जो लोग खामोश थे उनकी ताकत दोनों तरफ थी। जॉर्ज पंचम की नाक के लिए हथियार बन्द पहरेदार तैनात कर दिए गए थे, किसी की हिम्मत नहीं थी कि कोई उनकी नाक तक पहुँच जाए। हिन्दुस्तान में जगह-जगह पर ऐसी नाकें खड़ी थीं और जिन तक लोगों के हाथ पहुँच गए उन्हें शानो-शौकत के साथ उतारकर अजायबघरों में पहुँचा दिया जाता था। कहीं-कहीं पर तो शाही लाटों की नाकों के लिए गुरिल्ला का युद्ध होता था। उसी जमाने में यह हादसा भी हुआ था। इण्डिया गेट के सामने वाली जॉर्ज पंचम की लाट की नाक अचानक से गायब हो गई। सभी हथियारबन्द पहरेदार गश्त लगाए अपनी जगह तैनात रहे। लाट की नाक चली गई।

प्रश्न 2. मूर्तिकार ने नाक के लिए कहाँ-कहाँ जाकर किन नेताओं की मूर्तियों की नाक टटोली?

उत्तर : मूर्तिकार जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) की नाप लेकर सम्पूर्ण देश के दौरे पर निकल पड़ा। दिल्ली से बम्बई (मुम्बई) जाकर दादाभाई नौरोजी, गोखले, तिलक, शिवाजी-आदि की नाकें टटोलीं। मुम्बई से गुजरात गया। गुजरात जाकर गांधी, पटेल, महादेव देशाई की मूर्तियों की नाकें टटोलीं। फिर गुजरात से बंगाल गया और रवीन्द्रनाथ, सुभाष, राजाराममोहन राय की नाकें टटोलीं। बिहार में जाकर शहीद बच्चों की नाकें टटोलीं। उत्तर-प्रदेश गया और चन्द्रशेखर आजाद, बिस्मिल, मोतीलाल नेहरू, मदनमोहन मालवीय और घबराहट में मद्रास पहुँचकर सत्यमूर्ति की मूर्ति को देखा। मैसूर, केरल प्रान्तों का दौरा करता हुआ

पंजाब गया और वहाँ जाकर लाला लाजपतराय, भगतसिंह की लाटों का निरीक्षण किया और आखिर में मुँह लटकाए दिल्ली पहुँचा।

प्रश्न 3. ‘जॉर्ज पंचम की नाक’ (George Pancham Ki Naak) पाठ की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:  ‘जॉर्ज पंचम की नाक’ (George Pancham Ki Naak) की पृष्ठभूमि उस समय की है जब इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ द्वितीय अपने पति के साथ हिन्दुस्तान पधारने वाली थीं। अखबारों में नित्य उनकी चर्चा हो रही थी। रोज लंदन के अखबारों से खबरें आ रही थीं कि शाही दौरे के लिए कैसी-कैसी तैयारियाँ हो रही हैं? रानी एलिजाबेथ का दर्जी इसलिए परेशान था कि रानी हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और नेपाल के दौरे पर कब और क्या पहनेंगी? उनका सेक्रेटरी और जासूस भी उनके आने से पहले ही इस महाद्वीप का तूफानी दौर करने वाला था। फोटोग्राफरों की फौजें तैयार हो रही थीं। दिन-प्रतिदिन की प्रतिक्रियाएँ अखबारों में छप रही थीं। छोटी-से-छोटी बात अखबारों में छप जाती थीं।

प्रश्न 4. रानी के दौरे का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा था वैसे-वैसे सरकारी तन्त्र के माथे पर बल पड़ते जा रहे थे।माथे पर बल पड़ने के क्या कारण थे?

उत्तर : रानी के दौरे को लेकर सभी तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी थीं। दिल्ली चारों ओर से चमक रही थी, इस बात से सरकारी तन्त्र के सभी हुक्काम अपनी तैयारी को लेकर आश्वस्त थे, खुश थे, फिर भी एक परेशानी आ गई थी, जिसके कारण सरकारी तन्त्र के माथे पर बल पड़े हुए थे कि उसी समय जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) हथियारबन्द पहरेदारों का गश्त लगते हुए भी गायब हो गई थी। नई दिल्ली में सब कुछ सम्पन्न दिखाई दे रहा था पर जॉर्ज पंचम की नाक न होना सरकारी तन्त्र के लिए शर्म की बात थी कि समय रहते नाक कैसे लगवाई जाए?

प्रश्न 5. रानी के आने से पहले नाक को लगवाने के लिए क्या प्रबन्ध किए गए?

उत्तर : रानी के आने से पहले नाक कैसे लगवाई जाए? इसके लिए निम्नलिखित प्रबंध किए गए-

  1. देश के भलाई चाहने वालो की मीटिंग बुलाई गई और नाक का मसला पेश किया गया कि क्या किया जाए? मीटिंग में उपस्थित लोगोंका एक ही विचार था कि अगर जॉर्ज पंचम की नाक नहीं है तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी।
  2. उच्च-स्तर पर सलाह-मशवरा कर निर्णय लिया गया कि हर हालत में नाक होना जरूरी है। कैसे भी नाक लगवाईजाए।
  3. अन्त में निर्णय हुआ और एक मूर्तिकार को दिल्ली में हाजिर होने के लिए हुक्म दिया गया और मूर्तिकार दिल्लीहाजिर हुआ।

प्रश्न 6. मूर्तिकार दिल्ली में आया और उसकी आँखों में आँसू आ गए। क्यों?

उत्तर : मूर्तिकार ने दिल्ली आकर हुक्कामों के चेहरे देखे तो उनके चेहरों पर अजीब परेशानी दिखाई दी। कुछ चेहरे लटके हुए थे, कुछ चेहरे उदास थे और कुछ चेहरे चिंतित थे। उन सभी लोगों की यह हालत देखकर लाचार कलाकार की आँखों में आँसू आ गए। मूर्तिकार उनकी इस परेशानी को जानना चाहता था तभी एक आवाज सुनाई दी, मूर्तिकार! जॉर्ज पंचम की नाक लगानी है।

प्रश्न 7. ‘जॉर्ज पंचम की नाक लगानी है’-सुनकर मूर्तिकार ने क्या कहा और उसका हुक्कामों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर : ‘जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) लगनी है’-सुनकर मूर्तिकार ने कहा कि नाक लग जाएगी। पर मुझे यह मालूम होना चाहिए कि यह लाट कब और कहाँ बनी थी। उस लाट के लिए पत्थर कहाँ से लाया गया था? मूर्तिकार की बातें सुनकर सभी हुक्काम एक दूसरे की ओर ताकने लगे। एक की नजर ने दूसरे से कहा कि यह बताने की जिम्मेदारी तुम्हारी है। अन्त में निर्णय हुआ और एक क्लर्क को फोन कर बुलाया और उसे इस बात का पता लगाने का काम सौंप दिया।

प्रश्न 8. क्लर्क की छानबीन का क्या परिणाम निकला?

उत्तर : क्लर्क ने पूरी मुस्तैदी से छानबीन की। पुरातत्व विभाग की फाइलों के पेट चीरे गए पर कुछ भी पता नहीं चला। क्लर्क ने लौटकर कमेटी के सामने काँपते हुए बयान किया कि सर! मेरी खता को माफ किया जाए, फाइलें सब कुछ हजम कर चुकी हैं।

प्रश्न 9. क्लर्क को फाइलों में कुछ नहीं मिला तो हुक्कामों ने फिर क्या किया?

उत्तर : क्लर्क को फाइलों में पत्थर के बारे में कुछ विवरण न मिलने पर हुक्कामों के चेहरे पर उदासी के बादल छा गए। फिर एक खास कमेटी बनाई गई और उस कमेटी के जिम्मे यह काम दे दिया गया कि जैसे भी हो, यह काम करना है और अब से इस नाक की जिम्मेदारी आप पर है। मूर्तिकार को फिर बुलाया गया और मसला हल कर दिया। उसने कहा-पत्थर की किस्म का पता न लगने पर परेशान मत होइए, मैं हिन्दुस्तान के हर पहाड़ पर जाकर ऐसा ही पत्थर खोजकर ले आऊँगा।

प्रश्न 10. सभापति का कौन-सा छोटा-सा भाषण अखबारों में छप गया?

उत्तर : सभापति को जब मूर्तिकार ने आश्वासन दे दिया कि पत्थर की किस्म का पता न लगने पर मैं स्वयं पहाड़ों से ऐसे पत्थर को खोज ले आऊँगा। मूर्तिकार के आश्वासन से आश्वस्त होकर कमेटी की जान में जान आई और सभापति ने बड़े गर्व से कहा था- “ऐसी क्या चीज है जो हमारे हिन्दुस्तान में मिलती नहीं है। हर एक चीज हमारे देश के गर्भ में छिपी है, जरूरत सिर्फ खोज करने की है। खोज करने के लिए हमें मेहनत करनी होगी, इस मेहनत का फल हमें जरूर मिलेगा, आने वाला जमाना खुशहाल होगा।” यह छोटा-सा भाषण अखबारों में छप गया।

प्रश्न 11. मूर्तिकार के पत्थर ढूँढ़ने के असफल प्रयास पर सभापति ने मूर्तिकार से क्या टिप्पणी की? 

अथवा

 सभापति के तैश का क्या कारण था और उसने मूर्तिकार से क्या कहा?

उत्तर : मूर्तिकार पत्थर की खोज के लिए हिन्दुस्तान के पहाड़ी प्रदेशों और पत्थरों की खानों के दौरे पर निकल पड़ा किन्तु उसे सफलता नहीं मिली। कुछ दिनों के बाद वह हताश लौटा। उसके चेहरे पर लानत बरस रही थी। उसने सिर लटकाकर खबर दी-“हिन्दुस्तान का चप्पा-चप्पा खोज डाला पर इस किस्म का पत्थर कहीं नहीं मिला। यह पत्थर विदेशी है।” यह सुन समापति को तैश आ गया। सभापति ने तैश में आकर मूर्तिकार से कहा-“लानत है आपकी अक्ल पर! विदशों की सारी चीजें हम अपना चुके हैं-दिल-दिमाग, तौर-तरीके और रहन-सहन, जब हिन्दुस्तान में बाल-डाँस तक मिल जाता है तो पत्थर क्यों नहीं मिल सकता?”

प्रश्न 12. “यह बात अखबार वालों तक न पहुँचे”-इस शर्त पर मूर्तिकार ने क्या कहा और क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर : यह बात अखबार वालों तक न पहुँचे-इस शर्त पर मूर्तिकार ने बन्द कमरे में यह बात कही कि-‘देश में अपने नेताओं की मूर्तियाँ भी हैं, अगर इजाज़त हो तो और आप ठीक समझें तो… मेरा मतलब है तो… जिसकी नाक उस लाट पर ठीक बैठे, उसे उतार लाया जाए…।” मूर्तिकार की इस बात को सुनकर सबने उसकी तरफ देखा। सबकी आँखों में एक क्षण की बदहवासी के बाद खुशी तैरने लगी। सभापति ने धीरे से कहा, “लेकिन बड़ी सावधानी से।” मूर्तिकार जॉर्ज पंचम की नाक की नाप लेकर नेताओं की नाक नापने निकल पड़ा।

प्रश्न 13. अन्त में कानाफूसी कर मूर्तिकार को सभापति द्वारा किस बात के लिए इजाज़त दे दी गई?

उत्तरं : जब मर्तिकार को किसी नेता की मूर्ति की नाक जॉर्ज पंचम की नाक के लिए फिट नहीं दिखाई दी तो बन्द कमरे में बैठी हुई कमेटी को हैरतअंगेज योजना पेश की। इस योजना की भी शर्त थी कि यह खबर भी अखबार वालों तक न पहुंचे। उसने अपनी योजना बताई कि-“चूँकि नाक लगना एकदम जरूरी है, इसलिए मेरी राय है कि चालीस करोड़ में से कोई एक जिन्दा नाक काटकर लगा दी जाए…।” . इस बात के साथ ही सभा में सन्नाटा छा गया। सभापति ने सबकी तरफ देखा। सबको परेशान देखकर मूर्तिकार धीरे से अचकचाकर बोला- “आप लोग क्यों घबराते हैं। यह काम मेरे ऊपर छोड़ दीजिए। नाक चुनना मेरा काम है, आपकी सिर्फ इजाज़त चाहिए।” सभापति द्वारा लोगों से कानाफूसी करके मूर्तिकार को इजाज़त दे दी गई।

प्रश्न 14. सभापति द्वारा मूर्तिकार को जिन्दा नाक लगाने की इजाज़त दिए जाने पर अखबार वालों ने अखबार में क्या छापा?

उत्तर : सभापति ने जिन्दा नाक लगाने की इजाजत दे दी। इस प्रकरण को अखबारों में छापा गया। “अखबारों में सिर्फ इतना छपा कि नाक का मसला हल हो गया है और राजपथ पर इंडियागेट के पास वाली जॉर्ज पंचम की लाट के नाक लग रही है।”

प्रश्न 15. अखबार वाले सरकारी तन्त्र की इच्छा के अनुकूल भी लिखते हैं और ऐसे कार्यों को छापने से बचते हैं जो उनकोनहीं करना चाहिए? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : अखबार वाले सरकारी तन्त्र की प्रशंसा में तो खूब रस लेकर छोटी-सी बात को छापते हैं किन्तु जिस कार्य से सरकार की पोल खुलती हो उससे या तो बचते हैं या उसमें शब्दों की हेर-फेर कर अनर्थ को अर्थवान् बना प्रस्तुत करते हैं। जैसे जॉर्ज पंचम की लाट पर जिन्दा नाक लगाने पर चमत्कृत शब्दों में प्रस्तुत कर देते हैं कि जॉर्ज पंचम के जिन्दा नाक लगाई गई है। यानी नाक जो कतई पत्थर की नहीं लगती। इसी प्रकार जिन्दा नाक लगाने के शर्मनाक दिन कोई अखबार इस घटना को यथार्थ छापकर या कोई लेख लिख अपनी साहसिक और ईमारदार छवि को प्रस्तुत नहीं कर सका। इसे अखबार वालों का सरकार तन्त्र के अनुकूल मौन संस्तुति भी है-यह भी कहा जा सकता है। इस तरह अखबार की दुनिया का सरकार से अप्रत्यक्ष रूप से घनिष्ठ सम्बन्ध बना रहता

प्रश्न 16. जॉर्ज पंचम की लाट पर जिन्दा नाक लगने के दिन समारोह न होने के क्या कारण रहे होंगे?

उत्तर : जॉर्ज पंचम की लाट पर जिन्दा नाक लगने के दिन समारोह न होने के कारण निम्न कारण हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं

  1. मूर्तिकार की जिन्दा नाक लगाने की योजना ने सबको हतप्रभ कर दिया था। नाक नापने का दायित्व भी उसी काथा। इसलिए अपनी नाक नपने का सबको भय सताया हुआ था।
  2. सम्पूर्ण सरकारी तन्त्र बड़े-बड़े हुक्काम नाक फिट बैठने न बैठने के कारण भयभीत थे। यदि उस बार भी नाक न _फिट बैठी तो अपनी नाक कट जाएगी। इस निराशाजनक स्थिति में कोई समारोह में भाग नहीं ले पा रहे थे।
  3. हुक्कामों के लिए आज सबसे बड़ा समारोह था कि कैसे भी नाक लग जाए। इसलिए सभी इसी व्यवस्था और आशा ___ में लगे हुए थे।
  4. यद्यपि सभी हुक्काम जिन्दा नाक लगाने की पोल खुल जाने और जन मानस के विरोध की आशंका उनके मन में समायी रही होगी।
  5. हुक्काम भी जानते थे कि बुत पर जिन्दा नाक लगाना और किसी की नाक उतारना अनुचित है। अपनी लज्जाजनक

प्रवृत्ति से अन्दर ही अन्दर लज्जा अनुभव कर रहे होंगे।

प्रश्न 17. क्या सचमुच अखबार वालों के पास कुछ भी छापने के लिए नहीं था या और कोई कारण रहा होगा? अपने विचारलिखें?

उत्तर ऐसा नहीं है कि कहीं भी कोई कार्य नहीं हुआ इसलिए उनके पास छापने के लिए नहीं था। जब एलिजबेथ के कुत्तों, बावरचियों की तस्वीरें और जीवनियाँ छप सकती हैं तो कैसे कहा जा सकता है कि छापने के लिए कुछ नहीं था? क्या उनके पास अपने विचार भी नहीं रहे, जो सम्पादकीय और वैचारिक लेख लिखे जाते हैं अखबार में न छपने का एक ही मुख्य कारण रहा होगा कि अखबार सरकार के कुकृत्यों को उजागर करने में न तो रुचि लेता है न साहस कर पाता है। यही कारण अखबार खाली रहने के रहे होंगे। एक कारण यह भी हो सकता है कि जिन्दा नाक लगाने का मौन विरोध किया हो और इसे सबसे अपमानजनक और लज्जा जनक या चुल्लूभर पानी में डूबने का साहस न दिखा सके हों और अपने घर में मुँह छिपाए बैठे रहे हों।

प्रश्न 18. विदेशी सभ्यता के प्रति बढ़ती हुई रुचि को देखकर लेखक ने किस तरह व्यंग्य किया है?

उत्तर : मूर्तिकार ने जब स्पष्ट किया कि जॉर्ज पंचम की मूर्ति का पत्थर भी जॉर्ज की तरह विदेशी है। तो सभापति ने खीज़ में कहा कि जब हम विदेशों की सारी चीजें अपना चुके हैं-दिल-दिमाग, तौर-तरीके और रहन-सहन, जब हिन्दुस्तान में बाल डांस तक मिल जाता है तो पत्थर क्यों नहीं मिल सकता। इस तरह लेखक ने भारतीय जनमानस में पाश्चात्य सभ्यता के प्रति बढ़ती हुई रुचि को देखकर वह व्यंग्य किया है।

प्रश्न 19. मूर्तिकार को समय की परख है। हाथ में आए अवसर और हुक्कामों की विवशता का खूब लाभ उठाया है। किसीप्रकार भी हाथ से निकलने नहीं देता है। कैसे?

उत्तर : मूर्तिकार चतुर, वाकपटु और अपने लाभ के लिए दुस्साहसिक कार्य करने से नहीं चूकता है। वह पैसों के लिए हाथ आए अवसर को खोना नहीं चाहता। चालाक इतना है सरकारी पैसे का दुरुपयोग करते हुए सम्पूर्ण देश का भ्रमण कर लेता है। उसे सरकारी तन्त्र की परख है। वह उनकी दुखती नाड़ी को पकड़ कर बेवकूफ बनाने में ही सफल नहीं होता अपितु उनक सोच को समाज के सामने लाने में भी समर्थ हो जाता है किन्तु धूर्त इतना है कि नाक के नाम पर जिन्दा नाक लगाने की सलाह देकर उनकी ही नाक कटा देने की चाल चलता है। दूसरी ओर देश के महान नेताओं का गौरव बढ़ाने में भूमिका निभाता है। जॉर्ज की नाक से सबकी नाक ऊँची बताता है। इस तरह मूर्तिकार केवल मूर्तिकार ही नहीं अपितु एक चालाक सुयोग्य व्यक्ति भी है।

प्रश्न 20. जॉर्ज पंचम की मूर्ति का पत्थर विदेशी है-यह जानकर सभापति ने जो उद्गार व्यक्त किए उससे क्या स्पष्ट होता

उत्तर : सभापति को पता चला कि जॉर्ज की मूर्ति का पत्थर विदेशी है, वह अपने देश में उपलब्ध नहीं है तो अपनी भावनाओं को व्यक्त किया कि जब अपने जीवन में हर प्रकार की विदेशी वस्तु का प्रयोग कर रहे हैं और जॉर्ज भी विदेशी हैं तो फिर विदेशी पत्थर को भारत में क्यों नहीं लाया गया? पत्थर तो सामान्य चीज है। विदेशी पत्थरों को भी भारत में लाना चाहिए, उसका उपयोग करना चाहिए। यदि आज विदेशी पत्थर भी यहाँ होता तो नाक के लिए ये दिन न देखने पड़ते। मूर्तिकार को इतनी मेहनत न करनी पड़ती।

प्रश्न 21. सरकारी दफ्तरों के क्लर्कों में उत्तरदायित्व का अभाव दिखाई देता है। कैसे?

उत्तर : सरकारी दफ्तरों के क्लर्कों में दायित्व का प्रायः अभाव दिखाई देता है। वे प्रमुख और करणीय कार्य से बचना चाहते हैं। यह कार्य अपना न होकर दूसरे का है। यह सोच रहता है। मूर्तिकार ने लाट के बारे में पूछा कि यह लाट कब बनी, कहाँ बनी? जैसे प्रश्न पूछने पर एक-दूसरे की ओर ताकते हैं और हरेक की नजर यही कहती है कि यह जिम्मेदारी तो तुम्हारी है, तुम्हारी थी। इस तरह ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ा जाता है। अन्त में यह गाज छोटे कर्मचारी पर गिर पड़ती है।

        इस पोस्ट के माध्यम से हम कृतिका भाग-2 के कक्षा-10  का पाठ-2 (NCERT Solutions for Class-10 Hindi Kritika Bhag-2 Chapter-2) के जॉर्ज पंचम की नाक पाठ के  प्रश्न-उत्तर (George Pancham Ki Naak Question Answer) के बारे में  जाने जो की  कमलेश्वर (Kamleshwar) द्वारा लिखित हैं । उम्मीद करती हूँ कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा। पोस्ट अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। किसी भी तरह का प्रश्न हो तो आप हमसे कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकतें हैं। साथ ही हमारे Blogs को Follow करे जिससे आपको हमारे हर नए पोस्ट कि Notification मिलते रहे।

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कृतिका भाग-2 ( गद्य खंड )

सारांश  प्रश्न-उत्तर 
अध्याय- 1 माता का आँचल प्रश्न-उत्तर 

NCERT / CBSE Solution for Class 9 (HINDI)

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