Dukh Ka Adhikar Summary | दुःख का अधिकार सारांश | NCERT Solutions For Class 9 Sparsh Chapter 1

Dukh ka Adhikar Summary | दुःख का अधिकार सारांश | NCERT Solutions for Class 9 Sparsh Chapter 1

Dukh ka Adhikar Summary | दुःख का अधिकार सारांश | NCERT Solutions for Class 9 Sparsh Chapter 1

Dukh ka Adhikar Summary | दुःख का अधिकार सारांश | NCERT Solutions for Class 9 Sparsh Chapter 1

          आज हम आप लोगों को स्पर्श भाग-1 कक्षा-9 पाठ-1 (NCERT Solutions for Class-9 Hindi Sparsh Bhag-1 Chapter-1) के दुःख का अधिकार पाठ का सारांश (Dukh ka Adhikar Summary) के बारे में बताने जा रहे है जो कि यशपाल (Yeshpal) द्वारा लिखित है। इसके अतिरिक्त यदि आपको और भी NCERT हिन्दी से सम्बन्धित पोस्ट चाहिए तो आप हमारे website के Top Menu में जाकर प्राप्त कर सकते हैं।

Dukh ka Adhikar Summary | दुःख का अधिकार सारांश

            इस कहानी का प्रमुख पात्र एक तेईस साल का युवक है जिसका नाम ‘भगवाना’ है। उसके पास डेढ़ बीघा जमीन है और वह उस जमीन में सब्जियाँ उगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। वह जब तक जीवित था, अपने परिवार के सभी सदस्यों को (जिनमें उसकी माँ, पत्नी और बच्चे हैं) कमाकर खिलाता था। एक दिन भगवाना अपने खरबूजे के खेत में इधर-उधर घूम रहा था। खरबूजे जहाँ रखे हुए थे, वहाँ पर तरावट थी। संयोग से उस समय उसका पैर साँप पर पड़ गया और साँप ने उसे डस लिया। उसकी माँ ने अपने बेटे को बचाने के लिए झाड़-फूंक, ओझा, नागदेव की पूजा कराई लेकिन भगवाना नहीं बचा। 

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सारांश  प्रश्नउत्तर 
अध्याय– 1 इस जल प्रलय में  प्रश्न-उत्तर
अध्याय– 2 मेरे संग की औरतें प्रश्न-उत्तर
अध्याय– 3 रीढ़ की हड्डी प्रश्न-उत्तर
अध्याय– 4 माटी वाली प्रश्न-उत्तर
अध्याय– 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया प्रश्न-उत्तर
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          उसकी अंतिम क्रिया करम के लिए घर में बचा हुआ सारा पैसा और सारा अनाज लग गया। दूसरे दिन सुबह भूखे बच्चों को खरबूजे खिलाई और बुखार से तपती बहू के लिए भोजन जुटाने के लिए वह बाज़ार में खरबूजे लेकर बेचने के लिए बैठ गई। सूतक में भी उस अधेड़ उम्र की औरत को खरबूज़े बेचते हुए देखकर लोग उस गरीब बुढ़िया को ताने देने लगे। लोग उसकी इस विवशता पर विचार किए बिना ही उसे बेहया और निष्ठुर कहने लगे। 

          लेखक कहानी के उत्तरार्ध में पड़ोस की एक धनी महिला पुत्र के शोक की चर्चा करते हुए कहते हैं कि वह ढाई महीने तक डॉक्टरों की देख-रेख में रहने पर भी हर पंद्रह मिनट में बेहोश होकर गिर जाती थी। लोग उसके प्रति सहृदयता से भर उठे थे। शोक की प्रकृति में वर्ग भेद नहीं होता। इस सत्य से परिचित होकर भी लोगों ने मात्र वर्ग भेद के आधार पर उस गरीब बुढ़िया के दुख को किसी ने नहीं समझा। 

Dukh ka Adhikar Question Answer | दुःख का अधिकार प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?

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          इस पोस्ट के माध्यम से हम स्पर्श भाग-1 कक्षा-9 पाठ-1 (NCERT Solutions for Class-9 Hindi Sparsh Bhag-1 Chapter-1) के दुःख का अधिकार पाठ का सारांश (Dukh ka Adhikar Summary) के बारे में जाने जो कि यशपाल (Yeshpal) द्वारा लिखित हैं । उम्मीद करती हूँ कि आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा। पोस्ट अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। किसी भी तरह का प्रश्न हो तो आप हमसे कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकतें हैं। साथ ही हमारे Blogs को Follow करे जिससे आपको हमारे हर नए पोस्ट कि Notification मिलते रहे।

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अध्याय2 ल्हासा की ओर प्रश्न -उत्तर
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अध्याय4 साँवले सपनों की याद  प्रश्न -उत्तर
अध्याय5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया प्रश्न -उत्तर
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अध्याय7 मेरे बचपन के दिन प्रश्न-उत्तर 
अध्याय8 एक कुत्ता और एक मैना

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