Azadi Ka Amrit Mahotsav : 75th Independence Day 2022

Azadi Ka Amrit Mahotsav : 75th Independence Day 2022

azadi ka amrit mahotsav

इस बार हम Azadi Ka Amrit Mahotsav (75th Independence Day 2022) मना रहे हैं। आजादी के अमृत महोत्सव का मतलब होता है स्वतंत्रता सेनानियों से प्राप्त प्रेरणा का अमृत। स्वतंत्रता का अमृत यानी नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों का अमृत, स्वतंत्रता का अमृत है और एक ऐसा पर्व है जिसमें भारत आत्मनिर्भर होने का संकल्प लेता है। ये एक स्वतंत्रता का उत्सव है जो हर 25 साल पर हमारे देश में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस को मनाने के पीछे ये तर्क है कि हमारी आज की पीढ़ी के बच्चे ये जान सकें कि भारत को आजादी दिलाने के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को कितने संघर्ष और कठनाइयों का सामना करना पड़ा था।

किसी भी देश का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है जब उसके आज की मौजूदा पीढ़ी अपने इतिहास के विरासतों और आज के अनुभवों को गौरव के साथ पल-पल जुड़ कर गौरवान्वित महसूस करता रहे।

भारत के पास एक समृद्ध ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का एक अताह भंडार है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए और सभी भारतीय करते भी है गर्व आज भी। इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय चेतना को भारत के घर-घर पहुँचाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अहमदाबाद, गुजरात में साबरमती आश्रम से एक पदयात्रा (स्वतंत्रता मार्च) को हरी झंडी दिखाकर स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के लिए समर्पित “Azadi Ka Amrit Mahotsav” कार्यक्रम का उद्घाटन किया है।

Azadi Ka Amrit Mahotsav कब से कब तक चलेगा

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 12 मार्च 2021 को “भारत के Azadi Ka Amrit Mahotsav” पहल की पहली घोषणा की गई थी। ये पहल 15 अगस्त 2023 तक जारी रहेगा। इसको शुरू करने के पीछे हमारे आज की पीढ़ी को हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की बलिदान के प्रति जागरूक करना और हमें श्रद्धांजलि देना है। ये पहल उन महापुरुषों के सपनों के बारे में बताएगी जिन्होंने ने ना केवल आजादी की लड़ाई लड़ी बल्कि अपने प्राण भी त्याग दिए और अमर हो गए।

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भारत के हुए ऐतिहासिक स्वतंत्रता संग्राम

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भारत की आज़ादी पर योगदान करने वाली सब से बड़ी क्रांति और संग्राम 1857 का स्वतंत्रता संग्राम, महात्मा गांधी जी के विदेश से वापसी, देश को फिर से ‘सत्याग्रह’ की शक्ति की याद दिलाना, लोकमान्य तिलक जी का ‘पूर्ण स्वराज’ का अवाह्न, नेताजी सुभाष चँद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज का “दिल्ली मार्च” और “दिल्ली चलो का नारा” है। मंगल पांडे, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्राशेखर आजाद, भगत सिंह, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, भीमराव अंबेडकर जी इत्यादि भारत के संग्रामों के धुरंधरों के कुछ प्रमुख नाम है।

भारत में हुए कुछ पहल-

इतिहास के इस गौरव को याद रखने के लिए राज्य के हर छेत्र में इस दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। देश ने दो साल पहले ही दांडी यात्रा स्थल के पुनर्गठन का काम पूरा कर लिया है। अंडमान में जहाँ नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने देश की पहली स्वतंत्र सरकार बनाकर तिरंगा फहराया था वहाँ देश ने उस भूले-बिसरे इतिहास को फिर से भव्य रूप देने का प्रयास किया है। अंडमान और निकोबार के द्वीपों का नाम स्वतंत्रता संग्राम के नाम पर रखा गया। जलियांवाला बाग, पाईका आंदोलन की स्मृति के सभी स्मारकों पर काम पूरा हो गया है। दशकों से भुला दिए गए बाबासाहेब से जुड़े स्थानों ने पंचतीर्थ का निर्माण किया है।

विभिन्न आंदोलनों में भुमिकाएँ

भारत की आजादी दिलाने के लिए देश के कोने-कोने से पुरुष, महिलाओं और युवाओं  ने असंख्य तपस्यायों का बलिदान दिया था। स्वतंत्रता आंदोलन की इस ज्योति की पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण हर दिशा में, हर क्षेत्र में निरन्तर जगाने का कार्य हमारे संत-महंतों, आचार्यों ने किया है। भक्ति आंदोलन ने एक तरह से राष्ट्रव्यापी स्वतंत्रता आंदोलन की रीढ़ तैयार की थी। ‘नमक’ उस समय भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक था जब गाँधी जी ने दांडी यात्रा की और ‘नमक’ कानून को तोड़ा। अंग्रेजों ने भारत की इस आत्मनिर्भरता को खत्म करने का प्रयास करने के साथ-साथ उसके मूल्यों पर प्रहार भी किया था। उस समय भारत के लोगों को इंग्लैंड से आने वाले नमक पर निर्भर रहना पड़ता था। ये आंदोलन हर भारतीय का संकल्प बनने में सफल रहा क्योंकि हमारे देश मे ‘नमक’ को एक प्रकार वफादारी का प्रतीक भी माना जाता है। आज भी हम कहते हैं कि हमने देश का नमक खाया है इसलिये नहीं की नमक बहुत कीमती चीज़ है बल्कि ऐसा इसलिए है क्योंकि नमक हमारे लिए श्रम और समानता का प्रतीक है। जब हम ब्रिटिश शासन के उस युग के बारे में सोचते हैं जब देश का हर व्यक्ति स्वतंत्रता की प्रतीक्षा कर रहा था तो ये विचार स्वतन्त्रता के इस 75 वर्ष के उत्सव को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। आजादी का अमृत महोत्सव आजादी की लड़ाई की यादों को ताजा करने के साथ-साथ आजाद भारत के सपनों और कर्तव्यों के देश के सामने रख कर आगे बढ़ने की भी प्रेरणा देता है।

Azadi Ka Amrit Mahotsav की नींव और उद्देश्य

हमारे भारत के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्र और प्रगतिशील भारत, इसकी विविध आबादी और इसके समृद्ध इतिहास के 75 गौरवशाली वर्षों का जश्न मनाने के लिए “भारत की आजादी के अमृत महोत्सव” की पहल शुरू की है।

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75वीं अमृत महोत्सव के 5 मुख्य स्तंभ है

Azadi Ka Amrit Mahotsav 5 Main Pillars
1स्वतंत्रता संग्राम
275 वर्षों में उपलब्धियां
3योजनाएं
4संकल्प
5कार्य
Azadi Ka Amrit Mahotsav 5 Main Pillars

ये आजादी का अमृत महोत्सव उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने भारत को अंग्रेजों से मुक्ति दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभियान का एक और मकसद है और वो है भारत को आत्मनिर्भर बनाना।

Azadi Ka Amrit Mahotsav पर होने वाले विभिन्न कार्यक्रम

  • भारत सरकार ने 259 सदस्यों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है और समिति के प्रमुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी है।
  • सभी स्वतंत्रता सेनानी जो अब गुमनाम भी हो चुके है और जिन्होंने स्वंत्रत भारत की उपस्थिति के लिए अपने आराम और जीवन का बलिदान दिया उन्हें उजागर कर उन्हें सम्मानित करना है।
  • देश के विकास और प्रगति में युवाओं की जागरूकता और रुचि बढ़ाना है।
  • हमारे देश की विभीन्न संस्कृतियों को जानना हमारा कर्तव्य है।
  • ‘विविधता में एकता’ भी आजादी के अमृत महोत्सव अभियान के उद्देश्यों में से एक है।

75th Azadi Ka Amrit Mahotsav का निष्कर्ष

ये हम सभी के लिए बड़ी सौभाग्य की बात है कि हम स्वतंत्र भारत के इस ऐतिहासिक काल को देख रहे हैं और इसका उत्सव मना रहे हैं जिसमें भारत प्रगति की नई ऊचाईयों को छू रहा है। आज के स्वंत्रत भारत का नाम दुनिया में अग्रिम पंक्ति में लिखा हुआ है। आजादी के अमृत महोत्सव के इस दिव्य और पुण्य अवसर पर हम अपने सभी बलिदानियों और स्वंत्रतता सेनानियों के चरणों मे अपनी श्रधांजलि अर्पित करते हुए उन्हें बारमबार कोटि नमन करते हैं।

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